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सिद्धार्थनगर : कृषि विज्ञान केंद्र सोहना के वैज्ञानिकों ने किसानों को बताए लाभ के तरीके

दैनिक बुद्ध का संदेश
भनवापुर/सिद्धार्थनगर। आजकल बत्तख पालन व्यवसाय पर लोग काफी जोर दे रहे हैं। बतख पालन व्यवसाय से लाभ प्राप्त करने के लिए अचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कुमारगंज अयोध्या द्वारा संचालित कृषि विज्ञान केंद्र सोहना के कृषि वैज्ञानिक डॉ डीपी सिंह ने किसानों को सलाह देते हुए बताया कि बत्तखों के अण्डे एवं मांस लोग बहुत पसंद करते हैं,

अतः बत्तख पालन व्यवसाय की किसानों के लिए बड़ी संभावनाएँ हैं। बत्तख पालने से बहुत लाभ होता हैं। उन्नत नस्ल की बत्तख 250 से अधिक अण्डे एक साल में देती हैं। बत्तख के अण्डा का वजन 70 से 75 ग्राम होता है। जोकि मुर्गियों के अंडे की तुलना में 20 से 25 ग्राम अधिक होता है। बत्तख के अंडे का उपयोग कई बीमारियों से बचाव हेतु भी खाने की सलाह दी जाती है। बत्तख अधिक रेशेदार आहार पचा सकती हैँ। साथ ही पानी में रहना पसंद होने से बहुत से जलचर जैसेदृघोंघा वगैरह खाकर भी आहार की पूर्ति करते हैं। अतः बत्तखों के खान-पान पर अपेक्षाकृत कम खर्च करना पड़ता है । बत्तख दूसरे एवं तीसरे साल में भी काफी अण्ड़े देती रहती हैँ। अतः व्यवसायिक दृष्टि से मुर्गियों की अपेक्षा बत्तखों की उत्पादक अवधि अधिक होती है। मुर्गियों की अपेक्षा बत्तखों में कम बीमारियाँ होती हैं। बहता हुआ पानी बत्तखों के लिए काफी उपयुक्त होता है, किन्तु अन्य पानी के स्त्रोत वगैरह में भी बत्तख पालन अच्छी तरह किया जा सकता है। अंडे देने वाली नस्लें- इंडियन रनर एवं खाकी केंबेल।मांस देने वाली नस्ल- सफेद पैकिंग, एलिसबरी, मस्कोवी, राउन, आरफींगटन, स्वीडन, पेकिंग। मांस और अंडों के लिए संयुक्त रूप से- खाकी कैंपबेल प्रजाति हैं।इस दौरान राम यादव, राम अचल यादव, अजीत और सुरेश किसानों के साथ कृषि विज्ञान केंद्र सोहना के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ ओपी वर्मा, डॉ मार्कंडेय सिंह, मैडम नीलम सिंह, दीप नारायण सिंह, जय प्रकाश द्विवेदी, मौसम विशेषज्ञ सूर्य प्रकाश सिंह, मौसम प्रेक्षक अर्जुन सिंह यादव, काला नमक धान के नवनियुक्त वैज्ञानिक प्रेम कुमार चौरसिया आदि उपस्थित रहे।

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