बहुजन एकता मंच द्वारा सरकार से सामाजिक सवाल

सिद्धार्थनगर। जनपद सिद्धार्थनगर के बहुजन एकता मंच के लोगों ने देश और प्रदेश सरकार से सामाजिक सवाल करते हुए कहा कि अगर संविधान धर्मनिरपेक्ष है, तो फिर सरकारी संस्थानों में पूजा, हवन, मूर्ति स्थापना और धार्मिक आयोजन क्यों होते हैं। क्या सरकार बता सकती है कि आजादी के 75 सालों में बहुजन समाज से कितने जज, सचिव, कुलपति, मुख्य सचिव, डीजीपी या नीति-निर्माता बने हैं। हर बर्ष अरबों रुपये मंदिर निर्माण, तीर्थ यात्रा और धर्माचार्यों को क्यों दिये जाते हैं, जबकि दलित बस्तियों में स्कूल, हॉस्पिटल, लाइब्रेरी की भारी कमी है। आज भी गांवों में दलितों को पंचायत भवन, मंदिर, श्मशान और नलकूप से भेदभाव क्यों झेलना पड़ता है और सरकार चुप है। क्या सरकार यह सुनिश्चित कर सकती है कि अगली पीढ़ी को जातिसूचक शब्दों से गाली न दी जायें और दोषियों को तुरन्त सजा हो। आखिर सरकारी स्कूलों की हालत खराब क्यों है, जबकि मंत्रियों और अधिकारियों के बच्चे प्राइवेट इन्टरनेशनल स्कूलों में पढ़ते हैं। क्या सरकार बता सकती है कि कौन से दलों ने बाबा साहब की नीतियों को लागू किया और किसने केवल वोट के लिए इस्तेमाल किया। ओबीसी समाज की जातिगत जनगणना को आज तक क्यों दबाया गया है? क्या सरकार सच्चाई से डरती है। क्या सरकार यह बतायेगी कि हर बार सरकारी नौकरी में एससी/एसटी/ओबीसी कोटा खाली क्यों रह जाता है और भरे क्यों नहीं जाते। क्या किसी भी धर्म और पार्टी का प्रचार सरकारी स्कूलों, संस्थानों या संसद में होना चाहिए, जब संविधान में धर्म और राष्ट्र को अलग रखने की बात कही गई है। वहीं बहुजन एकता मंच के लोगों ने कहा कि सरकार जवाब दो, हम वोट से चुनते हैं तुम्हें, भगवान नहीं मानते।




