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उत्तर प्रदेशसिद्धार्थनगर

मुख्यालय पर फर्जी अस्पतालों और पैथोलॉजी सेन्टरों का पनप चुका काला साम्राज्य

सिद्धार्थनगर। जिला मुख्यालय इन दिनों बीमार स्वास्थ्य व्यवस्था की जीवन्त तस्वीर बन गया है। सनई चौराहे से लेकर बेलहिया और हुसैनगंज तक स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर एक काला साम्राज्य पनप चुका है। दर्जनों फर्जी अस्पताल और बिना लाइसेंस के चल रहे पैथोलॉजी सेन्टर न केवल कानून का मजाक उड़ा रहे हैं, बल्कि आमजन की जिन्दगी से खुला खिलवाड़ कर रहे हैं। जनपद के हुसैनगंज क्षेत्र अन्तर्गत पोखरभिटवा में स्थित आयुष हॉस्पिटल एण्ड फैक्चर क्लिनिक पर गम्भीर अनियमितताओं का पर्दाफाश हुआ है। आपको बता दें कि वीडियो और दस्तावेज़ों से यह स्पष्ट हो गया है कि इस अस्पताल में बिना किसी मेडिकल डिग्री वाले व्यक्ति द्वारा खुलेआम मरीजों का इलाज किया जा रहा है। मामले में सबसे चौंकाने वाला नाम सन्तोष वर्मा उर्फ राहुल वर्मा है, जो कि कथित रूप से ओपीडी में खुद को डॉक्टर बताकर मरीजों को दवायें लिखता है, इलाज करता है और इंजेक्शन तक लगाता है। 8 जून 2025 को भर्ती हुए मरीज आकाश के परिजनों ने इस फर्जीवाड़े का पर्दाफाश करते हुए वीडियो रिकॉर्डिंग और ओपीडी पर्चा जिलाधिकारी को सौंपा है। स्थानीय लोगों और स्वास्थ्य सूत्रों की मानें तो मुख्यालय क्षेत्र में लगभग 50 से अधिक छोटे-बड़े नर्सिंग होम, क्लीनिक और जांच केन्द्र संचालित हैं। इनमें से आधे से अधिक बिना किसी वैध पंजीकरण या योग्य चिकित्सकों के चल रहे हैं। इलाज के नाम पर मरीजों से मोटी रकम वसूली जाती है और जब स्थितियां बिगड़ती हैं, तो उन्हें जिला अस्पताल या गोरखपुर रेफर कर लिया जाता है।
मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ सरकारी चुप्पी पर उठते सवाल
फर्जी अस्पतालों की बढ़ती संख्या पर स्वास्थ्य विभाग की भूमिका सवालों के घेरे में है। सीएमओ कार्यालय द्वारा बीते 6 महीनों में मात्र 5 नोटिस जारी किये गयें, जबकि आधा दर्जन अस्पतालों को खानापूर्ति के तौर पर सील किया गया। जमीनी हकीकत यह है कि स्वास्थ्य विभाग की टीमें जांच के नाम पर सिर्फ वही अस्पताल देखती हैं, जिनकी लिखित शिकायत हो। हाल ही में जब इस विषय पर एसीएमओ से सवाल किया गया, तो उन्होंने इतना ही कहा कि जांच की जा रही है, जल्द ही ठोस कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा आने वाले समय में केवल योग्य डॉक्टर ही प्रैक्टिस कर सकेंगे।
सवालों के घेरे में प्रशासन
स्वास्थ्य विभाग के निरीक्षण और प्रशासनिक सक्रियता को लेकर कई गम्भीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं।
’ नियमित निरीक्षण क्यों नहीं हो रहा?
’ अवैध हॉस्पिटलों की सूची सार्वजनिक क्यों नहीं की गई?
’ जिन पर कार्रवाई हुई, उन पर एफआईआर क्यों नहीं हुई?
आपको बता दें कि सिद्धार्थनगर जिला मुख्यालय पर फैला यह काला कारोबार तब तक फलता-फूलता रहेगा, जब तक शासन-प्रशासन अपनी आंखें बन्द किये रहेगा। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की निष्क्रियता आने वाले दिनों में किसी बड़े हादसे की जमीन तैयार कर रही है। अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर इलाज के नाम पर चल रहे इस श्मौत के खेलश् को रोकने की जिम्मेदारी कौन लेगा?

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