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उत्तर प्रदेशसिद्धार्थनगर

अमृत भारत स्टेशन योजना कार्यक्रम में नहीं बुलाने पर व्यक्त की नाराजगी – विधायक

विधायक द्वारा मंडल रेल प्रबन्धक ने जवाब नहीं दिया तो विशेषाधिकार हनन के तहत मामला सदन में उठायेंगे

शोहरतगढ़/सिद्धार्थनगर। अमृत भारत स्टेशन योजना में चयनित सिद्धार्थनगर रेलवे में विधायक शोहरतगढ़़ विनय वर्मा को नहीं बुलाने पर उन्होंने मंडल रेल प्रबन्धक से नाराजगी जाहिर की है। विधायक विनय वर्मा ने मंडल रेल प्रबन्धक को पत्र भेज कर पूछा है कि जनप्रतिनिधि होने के बावजूद उन्हें कार्यक्रम में उन्हें किसी भी माध्यम से कोई भी सूचना नहीं दी गई। यह लोकार्पण कार्यक्रम देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से जुड़ा था। यह कार्यक्रम सबके लिए था। उन्हें कार्यक्रम में न बुलाने के पीछे किस नेता की साजिश थी। इसमें जिले के सभी विधायक व सांसद बुलाये जाने चाहिए थे और पहुंचे भी। मैं तो गठबंधन सरकार का विधायक था। फिर भी मुझे क्यों और किसके इशारे पर नहीं बुलाया गया? उन्होंने सवाल किया कि इसके पीछे किसकी राजनीति थी और इसको क्रियान्वित करने में आपकी क्या भूमिका थी? उन्होंने कहा कि यह बेहद दुखद, भर्त्सना करने योग्य व लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध है, जो कि मेरे लिए बेहद कष्टकारी है। मेरे द्वारा फोन द्वारा पूछने पर भी अभी तक आपने इसके कारण की कोई सूचना भी नहीं दी है। उन्होंने चेतावनी देते हुए मंडल रेल प्रबन्धक से पूछा कि इस कृत्य के लिए क्यों न आपके विरुद्ध कार्रवाई (विशेषाधिकार हनन) व जांच से सम्बन्धित पत्राचार किया जायें। वहीं भाजपा के अंदरूनी जानकार एनडीए विधायक के इस सवाल को लेटर बम की संज्ञा दे रहे हैं। विधायक विनय वर्मा ने अपने पत्र में किसी का नाम नहीं लिया है परन्तु समझने वाले समझ गये कि यह काम किसके इशारे पर किया गया है। खुद भाजपा, सपा व कांग्रेस के जानकार कहते हैं कि जो व्यक्ति शोहरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र में विधायक विनय वर्मा की जगह अपने किसी करीबी के लिए टिकट चाह रह होगा, या जिसका प्रभाव केन्द्र सरकार के रेल जैसे महत्वपूर्ण विभाग पर होगा, वही ऐसा कर सकता है। जिले में यह राजनीतिक कौशल व क्षमता किस राजनीतिज्ञ में है, यह सभी लोग जानते हैं। इस सम्बन्ध में विधायक विनय वर्मा ने बताया कि उन्होंने नाम किसी का नाम न लेकर उन्हें कार्यक्रम में न बुलाने की साजिश के खुलासे की मांग जरूर की है। अगर मंडल रेल प्रबन्धक इसका जवाब नहीं देते तो वे इस मामले को सदन में जरूर उठायेंगे। यह प्रोटोकाल और मर्यादा का सवाल है।

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