भगवान विष्णु ने संतों के उद्घार के लिए कभी राम कभी कृष्ण कभी नरसिंह रूप धरा – जयसिंह ब्यास

कुशीनगर/बोदरवार। स्थानीय ग्राम पंचायत साखोपार में स्थित शम्भू बाबा मंदिर परिसर में चल रहे श्री श्री 108 नौ दिवसीय शतचण्डी महायज्ञ के पहले दिन कथा बाचक जयसिंह ब्यास ने श्रद्धालुओं को मनु और सतरूपा की कथा सुनाई। कथा सुन श्रद्धालु भाव विभोर हो गए। कथा व्यास ने कहा भगवान को पुत्र रूप में पाने की इच्छा सभी की होती है। भगवान जैसा पुत्र पाने के लिए राजा मनु व सतरूपा की तरह तपस्या करनी पड़ती है। इस कठिन तपस्या को पूरा करने के के बाद ही मनु व शतरूपा ने पुनर्जन्म में भगवान राम को पुत्र के रूप में प्राप्त किया। कथावाचक ने कहा राजा मनु अपने पुत्र को राजपाट सौंप कर पत्नी के साथ भगवान विष्णु की कठोर तपस्या की। जब भगवान विष्णु प्रसन्न होकर उनके सामने आए तो दोनों ने भगवान से वर मांगा कि हमें आप जैसा पुत्र चाहिए। इस पर भगवान ने कहा कि मेरे जैसा तो मैं ही हो सकता हूं। इसलिए आपके अगले जन्म मैं आपके पुत्र के रूप में जन्म लूंगा। मनु ने अगले जन्म में दशरथ तथा सतरूपा ने कौशल्या के रूप में जन्म लेकर भगवान विष्णु को राम के रूप में पुत्र प्राप्त किया। इस दौरान यजमान तथा प्रधान प्रतिनिधि मनीष मिश्र गोलू मद्धेशिया, दीना मद्धेशिया, मोहन, विजय, बिरजू राजभर त्रिलोकी,लालू, नन्देश्वर सिंह, कमलेश सिंह आदि श्रद्धालु कथा में मौजूद रहे है।




