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उत्तर प्रदेशसिद्धार्थनगर

6.11 लाख रुपये के गबन पर डीएम सख्त, ग्राम विकास अधिकारी के निलंबन के निर्देश

दैनिक बुद्ध का संदेश
सिद्धार्थनगर। खुनियांव विकास खंड की चार ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन के कथित गबन और वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आने के बाद जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जी.एन. ने कड़ा रुख अपनाया है। जांच में कुल 6,11,426 रुपये की वित्तीय अनियमितता और गबन की पुष्टि होने पर संबंधित ग्राम विकास अधिकारी मोईदुर्रहमान के निलंबन के निर्देश दिए गए हैं।मामला सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) खुनियांव द्वारा ग्राम पंचायत खखरा-खखरी, बगहवा, सिरसिया और तेलियाडीह में कराए गए निरीक्षण के दौरान सामने आया। जांच रिपोर्ट में विकास कार्यों से संबंधित भुगतान और कार्यों में गंभीर अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है।जांच के अनुसार ग्राम पंचायत खखरा-खखरी में आंगनबाड़ी केंद्र मरम्मत एवं डस्टबिन इंस्टालेशन कार्य में 2,92,500 रुपये के गबन की पुष्टि हुई। यह अनियमितता तत्कालीन सचिव एवं ग्राम विकास अधिकारी मोईदुर्रहमान के कार्यकाल से संबंधित पाई गई।ग्राम पंचायत बगहवा में पंचायत भवन की चित्रकारी के लिए किए गए भुगतान में 69,000 रुपये तथा डस्टबिन इंस्टालेशन कार्य में 77,600 रुपये की वित्तीय अनियमितता सामने आई। जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि संबंधित भुगतान मोईदुर्रहमान के कार्यकाल में ही किए गए थे।इसी प्रकार ग्राम पंचायत सिरसिया में आंगनबाड़ी केंद्र मरम्मत कार्य में माप पुस्तिका (एमबी) से अधिक भुगतान कर 7,111 रुपये का गबन किया गया। साथ ही डस्टबिन इंस्टालेशन कार्य में 77,600 रुपये की अतिरिक्त अनियमितता भी पाई गई।वहीं ग्राम पंचायत तेलियाडीह में ओपन जिम निर्माण कार्य के लिए वित्तीय स्वीकृति प्राप्त किए बिना ही 87,615 रुपये की धनराशि आहरित कर ली गई। जांच में इसे नियमों का गंभीर उल्लंघन और सरकारी धन के दुरुपयोग की श्रेणी में माना गया है।जांच रिपोर्ट में अभिलेखों में कूटरचना, नियमविरुद्ध भुगतान और वित्तीय प्रक्रियाओं की अनदेखी जैसे आरोप भी सामने आए हैं। रिपोर्ट में ग्राम विकास अधिकारी मोईदुर्रहमान को प्रथम दृष्टया दोषी ठहराया गया है।रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जी.एन. ने मामले को गंभीर वित्तीय अनियमितता मानते हुए तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। उनके निर्देश पर जिला विकास अधिकारी को संबंधित ग्राम विकास अधिकारी को निलंबित करने तथा आगे की विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।प्रशासन अब पूरे प्रकरण की गहन जांच कर यह पता लगाने की तैयारी में है कि सरकारी धन के दुरुपयोग और अनियमित भुगतान में अन्य किसी अधिकारी, कर्मचारी अथवा संबंधित व्यक्ति की भूमिका तो नहीं रही। जिले में विकास कार्यों की पारदर्शिता और वित्तीय निगरानी को लेकर यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।

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