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उत्तर प्रदेशबस्ती

बस्ती में धीरेंद्र शास्त्री का कथा कराने का संकल्प , जान भी चली जाए तो पीछे नहीं हटेंगे

दैनिक बुद्ध का संदेश
बस्ती। दृढ़ इच्छाशक्ति और अटल संकल्प के सामने बड़ी से बड़ी बाधाएं भी टिक नहीं पातीं। इसी कहावत को चरितार्थ करने का दावा करते हुए बस्ती जिले के ‘पैड़ा वाले बाबा’ के नाम से प्रसिद्ध गोविन्द दास ने एक बड़ा धार्मिक संकल्प लिया है, जो अब चर्चा का विषय बन गया है। पैड़ा धाम में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान गोविन्द दास ने कहा कि उन्होंने यह प्रण लिया है कि जब तक धीरेंद्र शास्त्री की कथा बस्ती में नहीं करवा लेंगे, तब तक वे चप्पल नहीं पहनेंगे, अपने घर नहीं जाएंगे और यहां तक कि अपनी मां को ‘मां’ कहकर संबोधित भी नहीं करेंगे। उनका कहना है कि यह संकल्प उन्होंने सनातन विरोधियों को करारा जवाब देने के उद्देश्य से लिया है। गोविन्द दास ने बताया कि पिछले छह महीनों के दौरान उन पर दो बार जानलेवा हमला हो चुका है, लेकिन अभी तक पुलिस इन घटनाओं में कोई ठोस कार्रवाई या नतीजा नहीं निकाल पाई है। उन्होंने प्रशासन पर अप्रत्यक्ष रूप से सवाल उठाते हुए कहा कि जब धर्म के लिए आवाज उठाई जाती है, तो इस तरह की घटनाएं सामने आती हैं, लेकिन वे डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “यदि सनातन धर्म की रक्षा के लिए मुझे अपने प्राणों की आहुति भी देनी पड़े, तो मैं पीछे नहीं हटूंगा। मेरा संकल्प अटल है और इसे हर हाल में पूरा करूंगा।” इस दौरान उन्होंने अपने गुरु राजू दास पर पूरा भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि उनके गुरु का आशीर्वाद और मार्गदर्शन उन्हें लगातार मिल रहा है। साथ ही बस्ती की जनता से भी उन्होंने समर्थन की अपील की। गोविन्द दास ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि बस्ती की जनता और उनके समर्थक इस धार्मिक आयोजन को सफल बनाने में हरसंभव सहयोग करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि यह केवल एक व्यक्ति का संकल्प नहीं, बल्कि पूरे समाज और सनातन धर्म की आस्था से जुड़ा विषय है। गौरतलब है कि बागेश्वर धाम और उसके कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री इन दिनों देशभर में अपने धार्मिक कार्यक्रमों और कथाओं को लेकर चर्चा में रहते हैं। ऐसे में बस्ती में उनकी कथा कराने का यह संकल्प अब क्षेत्र में एक बड़ी धार्मिक और सामाजिक चर्चा का विषय बन गया है। फिलहाल इस पूरे मामले पर प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन गोविन्द दास का यह ऐलान आने वाले दिनों में जिले की धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है।

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