गोरखपुर        महराजगंज        देवरिया        कुशीनगर        बस्ती        सिद्धार्थनगर        संतकबीरनगर       
उत्तर प्रदेशसिद्धार्थनगर

2003 के वोटर लिस्ट वाले भी कठघरे मे

दैनिक बुद्ध का संदेश/जटाशंकर सोनी
इटवा/सिद्धार्थनगर इटवा तहसील क्षेत्र प्रक्रिया में नोटिसों की मार गलत मैपिंग और बीएलओ फीडिंग से जनता हलकान, 2003 की वोटर लिस्ट वाले भी कटघरे मेंइटवा तहसील में चल रही सर(स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया के तहत नोटिस भेजने का सिलसिला शुरू हो गया है, लेकिन यह प्रक्रिया अब विवाद और अव्यवस्था की वजह बनती जा रही है। फिलहाल कुछ ही गांवों में नोटिस भेजे गए हैं, जबकि बाकी गांवों के लोग रोज़ाना तहसील के चक्कर काटने को मजबूर हैं।तहसील कर्मचारियों का साफ कहना है।जब फोन जाएगा तभी आना वहीं जिन लोगों को नोटिस जारी हुई है। उनके लिए डॉक्यूमेंट्स के साथ तहसील में हाज़िर होना अनिवार्य कर दिया गया है। हालात ऐसे बन गए हैं मानो आम जनता को कोर्ट की तारीख़ मिल गई हो उसी तारीख़ में कागज़ जमा करने का आदेश।सबसे बड़ा सवाल गलती किसकीसबसे अहम और चिंताजनक सवाल यह है कि जिनका नाम 2003 की वोटर लिस्ट में दर्ज है।उन्हें भी नोटिस दी जा रही है। तो जिम्मेदार कौन है।विभाग या जनतास्थानीय लोगों का आरोप है कि गलत मैपिंग और अनट्रेंड बीएलओ द्वारा की गई फीडिंग के चलते सैकड़ों लोगों का नाम जोखिम में डाल दिया गया है।गांव-गांव में समस्याजानकारी के मुताबिक कमियों का आंकड़ा लगातार सामने आ रहा है।मुड़िला कमियां सिर्फ कमियां में करीब 200 लोग प्रभावित हैपिरैला सिसई (अलग टोला/सूची) में 82 मामले,सुहेलवा चरखवा में 100 से अधिक लोग नोटिस के दायरे में।इन गांवों के लोग यह पूछ रहे हैं कि जब गलती विभागीय स्तर पर हुई है, तो उसकी सजा जनता क्यों भुगतेअव्यवस्था से बढ़ा तनावएक ओर नोटिस सीमित गांवों में, दूसरी ओर बाकियों को सिर्फ फोन आने का इंतज़ार इससे तहसील परिसर में रोज़ाना भीड़ और नाराज़गी बढ़ती जा रही है। लोगों का कहना है कि स्पष्ट गाइडलाइन और समयबद्ध सूचना के अभाव में उन्हें बेवजह परेशान किया जा रहा है।स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों की मांग है किगलत मैपिंग और ठस्व् फीडिंग की उच्चस्तरीय जांच हो2003 की वोटर लिस्ट में नाम वालों को राहत दी जाएनोटिस प्रक्रिया पारदर्शी और समान रूप से सभी गांवों में लागू की जाएजनता को “कोर्ट जैसी तारीख़ के दबाव से मुक्त किया जाए।अब देखना यह है कि प्रशासन इस बढ़ते असंतोष पर क्या कदम उठाता है या फिर सर प्रक्रिया जनता के लिए और बड़ी परेशानी बनकर रह जाएगी।

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!