छठ महापर्व 25 से 28 अक्टूबर तक, पुजारी पं संतोष तिवारी ने पारंपरिक रीति-रिवाजों से मनाने का किया आग्रह

श्रावस्ती। सीता द्वार मंदिर के पुजारी पं संतोष तिवारी ने क्षेत्र के सभी श्रद्धालुओं से आग्रह किया है कि आगामी छठ महापर्व को पूर्ण श्रद्धा और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाएं, ताकि इस सनातन पर्व की प्राचीन गरिमा बनी रहे। इस वर्ष छठ पूजा का आयोजन 25 से 28 अक्टूबर तक किया जाएगा। पंडित तिवारी ने बताया कि छठ महापर्व की शुरुआत 25 अक्टूबर को ‘नहाय-खाय’ से होगी। इस दिन व्रती पवित्र स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं और सात्विक भोजन ग्रहण कर व्रत का शुभारंभ करते हैं। पर्व का दूसरा दिन ‘खरना’ 26 अक्टूबर (रविवार) को मनाया जाएगा। इस दिन सूर्याेदय सुबह 6रू07 बजे और सूर्यास्त शाम 5ः24 बजे होगा। व्रती पूरे दिन निर्जला व्रत रखकर शाम को सूर्यास्त के बाद गुड़-चावल की खीर व रोटी का प्रसाद ग्रहण करेंगे और इसके साथ ही 36 घंटे के निर्जला व्रत का संकल्प लेंगे। 27 अक्टूबर (सोमवार) को छठ का मुख्य दिन ‘संध्या अर्घ्य’ होगा। इस दिन श्रद्धालु नदी और तालाब के घाटों पर एकत्रित होकर डूबते सूर्य को अर्घ्य देंगे। इस अवसर पर बांस की टोकरी में ठेकुआ, फल, नारियल, गन्ना और अन्य प्रसाद सजाए जाते हैं। इस दिन सूर्यास्त शाम 5रू24 बजे और सूर्याेदय 6रू07 बजे रहेगा। अंतिम दिन ‘उषा अर्घ्य’ 28 अक्टूबर (मंगलवार) को मनाया जाएगा। इस दिन व्रती प्रातःकाल घाटों पर पहुंचकर उगते सूर्य को अर्घ्य देंगे, जो इस बार सुबह 6रू08 बजे होगा। अर्घ्य के बाद प्रसाद ग्रहण कर व्रत का पारण किया जाएगा। पंडित संतोष तिवारी ने कहा कि यह पर्व आस्था, अनुशासन और शुद्धता का प्रतीक है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे छठ महापर्व को सादगी और पारंपरिक विधि-विधान के साथ मनाकर समाज में एकता और श्रद्धा का संदेश दिया।




