आईसीएआर की गलत नीतियों के विरोध में कृषि विज्ञान केंद्रों का धरना-प्रदर्शन

भनवापुर/सिद्धार्थनगर। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) की नीतियों से नाराज़ देशभर के कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) के वैज्ञानिकों एवं कर्मचारियों ने एकजुट होकर शांतिपूर्ण ढंग से धरना और विरोध प्रदर्शन किया। इसी क्रम में सिद्धार्थनगर जनपद के कृषि विज्ञान केंद्र सोहना में भी 23 सितम्बर 2025 को केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष के नेतृत्व में सभी वैज्ञानिक एवं कर्मचारियों ने धरना एवं प्रदर्शन में हिस्सा लिया। भारत कृषि प्रधान देश है, जहां 60 प्रतिशत से अधिक आबादी प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है। किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए 1974 में पहला कृषि विज्ञान केंद्र पांडिचेरी (तत्कालीन तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत) स्थापित किया गया था। इसके सकारात्मक परिणामों को देखते हुए देश के प्रत्येक जिले में कृषि विज्ञान केंद्रों की स्थापना की गई। वर्तमान समय में इनकी संख्या बढ़कर 731 हो चुकी है। इनमें से केवल 9 प्रतिशत (66) कृषि विज्ञान केंद्र सीधे आईसीएआर के अंतर्गत संचालित हैं, जबकि लगभग 91 प्रतिशत (665) केंद्र राज्य कृषि विश्वविद्यालयों एवं विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों के अधीन कार्यरत हैं। समस्या यह है कि जहां आईसीएआर के अधीन कार्यरत कर्मचारियों को समय से प्रमोशन, पेंशन, ग्रैच्युटी और अन्य सभी सुविधाएं दी जाती हैं, वहीं गैर-आईसीएआर कृषि विज्ञान केंद्रों के वैज्ञानिक एवं कर्मचारियों को इन मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है। प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का आरोप है कि समान कार्य करने के बावजूद आईसीएआर गैर-आईसीएआर कृषि विज्ञान केंद्रों के कर्मचारियों को बराबरी का दर्जा नहीं दे रहा। यह न केवल ष्समान कार्य के लिए समान वेतनष् के संवैधानिक सिद्धांत का उल्लंघन है, बल्कि कर्मचारियों के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ है। समय-समय पर आईसीएआर द्वारा पत्राचार कर गैर-आईसीएआर केंद्रों के वैज्ञानिकों एवं कर्मचारियों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने की भी शिकायत सामने आई है। धरना स्थल पर कर्मचारियों ने कहा कि इस भेदभावपूर्ण नीति से न केवल कर्मचारियों का मनोबल टूट रहा है, बल्कि केंद्रों के कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। कर्मचारियों ने सरकार से मांग की कि गैर-आईसीएआर कृषि विज्ञान केंद्रों को भी आईसीएआर के अधीन केंद्रों की भांति सभी सुविधाएं दी जाएं, ताकि उनके साथ न्याय हो सके और किसान हित में चल रहे कार्यक्रमों को और मजबूती मिल सके। यह विरोध प्रदर्शन अखिल भारतीय कृषि विज्ञान केंद्र एवं एक्रिप फोरम के आह्वान पर देशव्यापी आंदोलन का हिस्सा है। सिद्धार्थनगर में हुए इस धरना-प्रदर्शन में वैज्ञानिकों एवं कर्मचारियों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज बुलंद की और सरकार से शीघ्र ठोस कदम उठाने की मांग की।




