डॉ0 श्रीजल की असाधारण सफलता,एफएमजीई परीक्षा में लहराया परचम, सिद्धार्थनगर में खुशी की लहर

सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थनगर में खुशी की लहर दौड़ गई जब यह समाचार मिला कि सुश्री डॉ0 श्रीजल ने प्रतिष्ठित एफएमजीई परीक्षा, जो भारत में चिकित्सा अभ्यास करने के लिए विदेशी चिकित्सा स्नातकों के लिए अनिवार्य है, को सफलतापूर्वक उत्तीर्ण कर लिया है। यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार के लिए गर्व का क्षण है, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है। डॉ0 श्रीजल की यह सफलता इसलिए भी विशेष है, क्योंकि उन्होंने इससे पहले विश्वविद्यालय में शीर्ष स्थान प्राप्त करके अपनी असाधारण प्रतिभा का प्रदर्शन किया था। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि अटूट लगन, कड़ी मेहनत और मजबूत इच्छाशक्ति के साथ किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है, चाहे परिस्थितियां कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों। डॉ0 श्रीजल न केवल एक मेधावी छात्रा हैं, बल्कि वे पढ़ाई के साथ-साथ अन्य गतिविधियों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती रही हैं। उन्होंने मिंस्क में भारतीय दूतावास द्वारा आयोजित कविता पाठ में भी सर्टिफिकेट प्राप्त किया, जो उनकी बहुमुखी प्रतिभा का प्रमाण है। साथ ही, उन्होंने विश्वविद्यालय में भी टॉप किया। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने बाबा जी राजेन्द्र प्रसाद पाठक को अपना प्रेरणा स्रोत और पिता अजय कुमार पाठक को अपना आदर्श बताते हुए दिया है। उनकी सफलता में उनके नाना जी, डॉ0 हरीश चन्द्र त्रिपाठी का विशेष मार्गदर्शन और सहयोग रहा है, साथ ही उन्होंने अपनी नानी, स्वर्गीय विजयलक्ष्मी त्रिपाठी के आशीर्वाद और प्रेरणा को भी महत्वपूर्ण बताया है। इस शुभ अवसर पर डॉ0 श्रीजल को उनके परिवारजनों बाबा जी राजेन्द्र प्रसाद पाठक (पूर्व प्रधानाचार्य, गांधी आदर्श विद्यालय इन्टर कॉलेज बढ़नी), पिता अजय कुमार पाठक (नायब नाजिर, डुमरियागंज), माता श्रीमती शैलेश पाठक (शिक्षिका), बड़े बाबा अवध नारायण पाठक (सेवानिवृत्त बीडीओ), छोटे बाबा रमाकान्त पाठक (राजस्व विभाग से सेवानिवृत), चाचा प्रधान सेवरा विजय कुमार पाठक और भाई सागर पाठक ने हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि डॉ0 श्रीजल का समर्पण, त्याग और अथक प्रयास पूरे परिवार और समुदाय के लिए प्रेरणा का स्रोत है। डॉ0 श्रीजल की शिक्षा यात्रा एक प्रेरणादायक कहानी है। उन्होंने 12वीं कक्षा लखनऊ पब्लिक स्कूल से उत्तीर्ण की और उसके बाद उच्च शिक्षा के लिए 2019 में में दाखिला लिया। अपनी कड़ी मेहनत और लगन के बल पर उन्होंने 2025 में विश्वविद्यालय में टॉप किया और आज एफएमजीई परीक्षा में सफलता प्राप्त करके अपनी योग्यता का लोहा मनवाया है। इस अवसर पर सागर पाठक (डॉ0 श्रीजल के भाई) ने कहा कि डॉ0 श्रीजल ने न केवल अपने माता-पिता का सपना साकार किया है, बल्कि उन सभी युवाओं को भी प्रेरित किया है, जो विदेशों में चिकित्सा शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। हमें पूर्ण विश्वास है कि वह अपनी ज्ञान और कुशलता से समाज की सेवा करेंगी और एक सफल डॉक्टर बनकर लोगों के जीवन में खुशियां लायेंगी। डॉ0 श्रीजल की सफलता निश्चित रूप से क्षेत्र के युवाओं को प्रेरित करेगी और उन्हें अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत करने के लिए प्रोत्साहित करेगी। हम उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हैं।




