विकास के नाम पर लाखों की लूट, पंचायत भवन से सामुदायिक शौचालय तक है भ्रष्टाचार का खेल

मिठवल/सिद्धार्थनगर। विकास खण्ड मिठवल के ग्राम पंचायतों में विकास योजनाओं के नाम पर सरकारी खजाने को खुली लूट का जरिया बना दिया गया है। ग्राम पंचायत गौरा पचपेड़वा का मामला इसका ताजा उदाहरण है, जहां पंचायत भवन और सामुदायिक शौचालय दोनों ही भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुके हैं। सरकार ने हर ग्राम पंचायत में आधुनिक पंचायत भवन बनाने के लिए जनता की गाढ़ी कमाई पानी की तरह बहाई, लेकिन ग्राम पंचायत गौरा पचपेड़वा में यह भवन भ्रष्टाचार की बलि चढ़ गया। केवल दीवारें खड़ी व छत ही डाली, बस औपचारिकता पूरी किया। उक्त में न दरवाजे, न खिड़कियां, न बिजली, न पानी है। कई साल बाद भी भवन आज तक निष्प्रयोज्य है। ग्रामीणों के लिए सुविधाएं अब भी दूर की कौड़ी है। ग्राम पंचायत गौरा पचपेड़वा के टोला पाली में बने सामुदायिक शौचालय की हालत भी पंचायत भवन जैसी ही है। लाखों रुपये की लागत से बने शौचालय का निर्माण अधूरा है। जो हिस्सा बना, वह भी ताले में बन्द हैं। वहीं कागजों पर शौचालय संचालित दिखाया गया।केयरटेकर और अन्य मदों में हर महीने धन का भुगतान हो रहा है। जमीनी हकीकत अधूरा शौचालय ताले में जकड़ा है। वहीं ग्रामीणों का आरोप है कि प्रधान और सचिव की मिलीभगत से सरकारी धन का खुला खेल चल रहा है। फर्जी बिल, झूठी रिपोर्ट और कागजी विकास है। योजनाओं की लीपापोती में करोड़ों की रकम डूब चुकी है। जनता को मिलने वाली सुविधाएं सिर्फ कागजों में सीमित है। इस खुली लूट में ब्लॉक के जिम्मेदार अफसरों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। बीडीओ मिठवल और एडीओ पंचायत मूकदर्शक बने हैं। जिम्मेदारों द्वारा न जांच, न कार्रवाई और न निगरानी है। सत्ता से जुड़े होने का फायदा उठाकर ग्राम प्रधान मनमानी जारी किये हैं। वहीं ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से इस घोटाले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। “सैंया भय कोतवाल तो डर अब काहे काष् यह कहावत चरितार्थ हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर तुरन्त कार्रवाई नहीं हुई तो वे सड़क पर उतरने को मजबूर होंगे। सूत्रों के मुताबिक मिठवल ब्लॉक में कई ग्राम पंचायतों के सामुदायिक शौचालयों, पंचायत भवनों और अन्य विकास योजनाओं में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है। अगले खुलासे में सामने आयेगा “कैसे जनता की गाढ़ी कमाई फर्जी बिलों, कागजी कामों और बन्दरबांट की भेंट चढ़ रही है।



