केंद्र सरकार भी लागू करे राष्ट्रीय पत्रकार पेंशन योजना :- देवेन्द्र कुमार मिश्रा, अध्यक्ष राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा परिषद
दैनिक बुद्ध का सन्देश
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बहराइच। राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष देवेंद्र कुमार मिश्रा ने पत्रकारों पर चिंता जताते हुए कहा कि केंद्र सरकार राष्ट्रीय पेंशन योजना देश में लागू करे, जिससे देश का हर पत्रकार इस योजना का लाभ उठा सके। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र के चार स्तंभों में से एक स्तंभ—पत्रकारिता—हमेशा से समाज और शासन के बीच की एक कड़ी होता है पत्रकारों का जीवन एक सतत संघर्ष और सेवाभाव का प्रतीक रहा है। वे उन आवाज़ों को सामने लाते हैं जो अक्सर दबा दी जाती हैं। वे न दिन देखते हैं, न रात, न बारिश का मौसम, न गर्मी की लू—बस सच की तलाश में लगातार भागते रहते हैं। लेकिन जब यह सच्चाई का सिपाही रिटायर होता है, तो वह समाज और व्यवस्था की नजर में अक्सर हाशिए पर चला जाता है ऐसे में बिहार सरकार की नई पहल, पत्रकार पेंशन योजना में संशोधन, उम्मीद की एक नई किरण बनकर सामने आई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा की गई घोषणा ने पत्रकारिता जगत को आश्वस्त किया कि उनकी दशकों की सेवा को नजरअंदाज नहीं किया गया है पत्रकारिता का क्षेत्र ऐसा है जिसमें न पेंशन की गारंटी है, न बुढ़ापे का सहारा। एक पत्रकार जब सक्रियता छोड़ देता है, तो न संस्थानों को उसकी जरूरत रहती है, न समाज उसे याद करता है। वह सिर्फ किरदार बन जाता है पत्रकार त्योहारों पर भी परिवार की खुशियों में नहीं शामिल हो पाते। बाढ़, दंगे, चुनाव क्राइम महामारी हर समय सबसे आगे रहते हैं। फिर भी उन्हें वह सामाजिक-सुरक्षा नहीं मिलती जो अन्य पेशों को प्राप्त है लेकिन सवाल अभी भी बाकी हैं क्या सरकार हम जैसों को इस योजना के लाभ के लायक मानती भी है हम जैसे हजारों पत्रकार, जो ज़मीन पर 20–30 सालों से लगातार काम कर रहे हैं, उन्हें न तो मीडिया संस्थान पत्रकार मानते हैं और न ही सरकार की फाइलों में उनका नाम दर्ज है ऐसे में यह चिंता वाजिब है कि क्या यह योजना उन तक पहुंचेगी, जो वास्तव में इसकी हक़दार हैं? सच यह है कि प्रदेश के 1 प्रतिशत पत्रकार भी शायद ही इस योजना के दायरे में आ सकें जिला स्तरीय संवाददाता, छोटे अख़बारों या पोर्टलों में काम करने वाले पत्रकार जिन्होंने वर्षों तक बिना सुविधाओं के सेवाएं दीं—वे पात्रता सूची में नहीं आते पत्रकारों की पात्रता की परिभाषा को व्यापक बनाया जाए अनुबंध पर काम करने वाले और स्वतंत्र संवाददाताओं को भी शामिल किया जाए जिला एवं प्रखंड स्तर पर पत्रकारों का पुनः सर्वेक्षण कराया जाए मान्यता की प्रक्रिया सरल और व्यावहारिक हो। इस योजना से जुड़ने की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी हो राष्ट्रीय स्तर पर भी पहल हो। बिहार सरकार की यह पहल एक मिसाल है, लेकिन इसे राष्ट्रीय स्तर पर भी दोहराने की ज़रूरत है। केंद्र सरकार को चाहिए कि वह राष्ट्रीय पत्रकार पेंशन योजना बनाए, जिससे देशभर के पत्रकार लाभान्वित हो सकें पत्रकारिता केवल एक पेशा नहीं, यह समाज की आत्मा है। जो लोग इसके जरिए सच, अन्याय और शोषण के विरुद्ध लड़ते हैं, उन्हें जीवन के अंतिम पड़ाव पर असहाय नहीं छोड़ा जा सकता। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की यह पहल न केवल एक सराहनीय निर्णय है, बल्कि पत्रकार बिरादरी को सम्मान लौटाने की दिशा में बड़ा कदम भी है। लेकिन यह तभी सार्थक मानी जाएगी, जब ज़मीन पर कार्यरत हर पत्रकार इसके दायरे में आए अन्यथा यह सिर्फ एक और ‘घोषणा’ बनकर रह जाएगी। केन्द्र सरकार से यह भी मांग करें कि वह हम जैसे “ग़ैर-पत्रकार” पत्रकारों को भी मान्यता दे।





