नगर पंचायत इटवा में पेड़ों की बेरहमी से कटाई, वन विभाग की मौन सहमति पर उठे सवाल

इटवा/सिद्धार्थनगर। नगर पंचायत इटवा इन दिनों पर्यावरणीय अपराधों का गढ़ बनता जा रहा है। पहले मिट्टी खनन, फिर बीच आबादी में कचरा डाले जाने और जलजमाव की समस्याओं के बाद अब बढ़नी रोड पर हरे-भरे पेड़ों की अवैध कटान चर्चा का विषय बन गई है। स्थानीय लोगों के अनुसार बेल, नीम और शीशम जैसे महत्वपूर्ण छायादार और औषधीय गुणों वाले पेड़ों को ष्जंगली पेड़ष् घोषित कर काटा जा रहा है। इस कार्यवाही में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि वन विभाग के एक चर्चित अधिकारी की मौजूदगी में यह काम हो रहा है, जिससे प्रशासन की मिलीभगत या लापरवाही की श्बूश् आ रही है। वहीं स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि कटान के पीछे निजी लाभ की मंशा हो सकती है। यह कार्यवाही न तो सार्वजनिक रूप से घोषित की गई है, न ही इसमें कोई वन विभाग की अनुमति दिख रही है। यह स्पष्ट नहीं है कि इस अवैध कटान की जानकारी जिलाधिकारी या एसडीएम स्तर के उच्चाधिकारियों को है या नहीं। यदि जानकारी के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हो रही है, तो यह सीधे तौर पर प्रशासनिक उदासीनता या संरक्षण को दर्शाता है। पूर्व में भी इटवा विवादों में रहा है। नगर पंचायत इटवा में हाल के महीनों में कई पर्यावरणीय एवं सार्वजनिक हित से जुड़े विवाद सामने आये हैं – जैसे कि तालाब की मिट्टी की अवैध खुदाई, कचरा डंपिंग, और जल निकासी की लचर व्यवस्था। अब पेड़ों की कटाई इस सूची में नया अध्याय जोड़ रही है। स्थानीय समाजसेवियों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने इस पूरे प्रकरण की स्वतन्त्र जांच की मांग की है। साथ ही यह भी मांग की जा रही है कि दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई हो और कटे पेड़ों की संख्या व प्रजातियों की विवरण रिपोर्ट सार्वजनिक की जाये। जैसे-जैसे विकास के नाम पर विनाश का यह खेल इटवा में खुलकर खेला जा रहा है, अब देखना होगा कि प्रशासन जागरूक नागरिकों की आवाज सुनेगा या यह मामला भी फाइलों की धूल में दबकर रह जायेगा।




