गृहस्थाश्रम सभी धर्मों का मूल-अयोध्या प्रसाद

पयागपुर/बहराइच। सात दिवसीय श्रीमद प्रज्ञा पुराण एवं गायत्री महायज्ञ में गृहस्थाश्रम की कथा सुनकर श्रोता मंत्रमुग्ध हो गये। गायत्री नव चेतना विस्तार केंद्र के तत्वावधान में भूपगंज बाजार स्थित रामलीला मैदान पर चल रहे सात दिवसीय श्रीमद प्रज्ञा पुराण कथा एवं गायत्री महायज्ञ के तीसरे दिवस कथावाचक अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी ने गृहस्थाश्रम की कथा सुनाई।कथावाचक ने कहा कि गृहस्थाश्रम समाज को सुनागरिक देने की खान है।आत्मोन्नति का अभ्यास करने के लिए सबसे अच्छा स्थान व आश्रम स्थल अपना घर परिवार ही है। महर्षि वेदव्यास के शब्दों मेंष्गाहि स्थेयेव हि धर्माणा, सर्वेषां मूल उच्यतेष्अर्थात गृहस्थाश्रम ही सर्व धर्माे का मूल है। श्री त्रिपाठी ने बताया कि जिस तरह प्राणी माता का आश्रय प्रकार जीवित रहते हैं उसी तरह सभी आश्रम गृहस्थाश्रम पर आधारित हैं। उन्होंने भारत की परिवार व्यवस्था को रत्नों की खान बताया।इस अवसर पर संगत टोली के द्वारा प्रस्तुत संगीतमय भजनों पर श्रोता भक्तिरस में सराबोर रहे।इस दौरान यजमान वशिष्ठ त्रिपाठी,गायत्री परिवार के ज्ञान प्रकाश शुक्ला,मालिकराम शर्मा,मैन बहादुर सिंह,अनुराग कश्यप,बदलूराम विश्वकर्मा, महराज दीन, कृष्ण कुमार सिंह आदि मौजूद रहे।




