टीबी मुक्त ग्राम बनाने में स्वयंसेवक निभाये भागीदारी-डॉ एस.एन. त्रिपाठी

कसया/कुशीनगर। राष्ट्रीय सेवा योजना बुद्ध स्नातकोत्तर महाविद्यालय कुशीनगर द्वारा आयोजित विशेष शिविर जो नगर पालिका परिषद के रामजानकी मठ में लगा है के छठवें दिन बुधवार को बौद्धिक सत्र में मुख्य अतिथि जिला क्षयरोग अधिकारी कुशीनगर डॉ एस एन त्रिपाठी ने कहा कि पहले लोग टीबी रोगियों को उपेक्षा की दृष्टि से देखते थे। लेकिन शिक्षा और जागरूकता के प्रभाव से अब परिस्थितियां बदली है।टीबी एक संक्रामक बीमारी है किंतु लाइलाज नहीं है।इसका इलाज नियमित रूप से निर्धारित दवाएं और पोषक तत्व लेने से संभव है। सरकार के आदेश पर स्वास्थ्य विभाग अभियान चलाकर टीबी रोगियों की निःशुल्क जांच और दवा वितरण का कार्य कर रही है।समाज के सक्षम और प्रबुद्ध नागरिकों से टीबी रोगियों को गोंद लेकर उनके लिए पोषक आहार की व्यवस्था की जा रही है।मेरा आप सभी से आग्रह है कि प्रत्येक स्वयंसेवक आज यह संकल्प ले कि अपनी बस्ती और गांव को टीवी मुक्त बनाने में अपनी भागीदारी निभायेगा।इस तरह से सभी के संकल्प और सहयोग से देश टीबी मुक्त होगा। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता बिरला धर्मशाला के प्रबंधक और वीरेंद्र तिवारी ने इस अवसर पर बोलते हुए कहा कि जब जब देश पर संकट आता है तब उसके निराकरण हेतु एन एस एस स्वयंसेवक राष्ट्र के साथ खड़े होते हैं।राष्ट्र की सेवा हेतु ही राष्ट्रीय सेवा योजना जैसे संगठन का निर्माण हुआ। यह स्वयंसेवक ही देश को टीबी मुक्त बनाने का माध्यम बनेंगे।उन्होंने कहा कि इस देश में सेवा का उदाहरण प्राचीन काल से ही भरा पड़ा है। यहां सर्वस्व दान कर देने की परंपरा रही है जैसे दधीचि, दानवीर कर्ण,राजा हरिश्चंद,हर्षवर्धन आदि के नाम प्रमुख हैं। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि और वरिष्ठ क्षयरोग चिकित्सक डॉ आशुतोष मिश्र ने बताया कि 24 मार्च 1882 को टीबी के जीवाणु की खोज की गयी थी।इसलिये इस दिन को विश्व क्षयरोय दिवस के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने स्वयंसेवकों से आग्रह किया कि आप लोग टीबी रोग के लक्षण वाले व्यक्तियों को अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंचने में मदद करे। टीबी को अगर हराना है तो स्वयंसेवक को आगे आना होगा।आपके सहयोग से ही 2025 तक टीवी मुक्त भारत का सपना साकार होगा। इससे पूर्व अतिथियों का परिचय और स्वागत डॉ निगम मौर्य ने किया जबकि आभार ज्ञापन डॉ पारस नाथ ने किया।इस अवसर स्वयंसेवक अंकित कुशवाहा ने अपने हाथ से बनाया हुआ स्मृति चिन्ह अतिथियों को भेंट किया।इस अवसर पर फूलचंद,संजय,वासुगोंड, गार्गी भट्टाचार्य समेत बड़ी संख्या में स्वयंसेवक उपस्थित रहे।




