आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हम सभी के दैनिक जीवन से जुड़ चुका है: राजेश चंद्र शर्मा
शैक्षिक नवाचार में चौट जीपीटी और ए.आई. की बढ़ती भूमिका

सिद्धार्थनगर। बुद्ध विद्यापीठ पी.जी. कॉलेज सिद्धार्थ नगर के राजनीति विज्ञान विभाग के तत्वावधान में शैक्षिक नवाचार में चौट जीपीटी और ए.आई .की भूमिका पर विद्यार्थियों के लिए कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता रजनीश उपाध्याय जी (एमसीए एवं कंप्यूटर विशेषज्ञ) रहे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रबंधक राजेश चंद्र शर्मा, अनिल मित्तल जी (चार्टर्ड अकाउंटेंट) रहे। रजनीश उपाध्याय ने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हम सभी के दैनिक जीवन में शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, मनोरंजन सभी क्षेत्र से जुड़ चुका है। चौट जीपीटी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का एक पार्ट है, जिसकी शुरुआत 2018 में अमेरिकन संस्थाओं के द्वारा किया गया और आज शिक्षा क्षेत्र में बच्चों और शैक्षणिक जगत के लिए एक नवाचार टूल के तौर पर प्रचलन में है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्रम में बच्चों को जैमिनी, अलेक्सा, वॉइस टेक्स्ट ट्रांसफार्मर , चौट जीपीटी के व्यावहारिक और सरल प्रयोग से अवगत कराया गया। महाविद्यालय के प्रबंधक राजेश चंद्र शर्मा ने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय महत्व पर बात रखी, उन्होंने बताया कि भारत सरकार वर्तमान में बड़ी धनराशि इसके प्रमोशन के लिए खर्च कर रही है और बहुत जल्द ही भारत अपना आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बनाने में सक्षम हो सकेगा। कार्यक्रम के संयोजक एवं संचालक एसोसिएट प्रोफेसर राजनीति विज्ञान विभाग डॉ शक्ति जायसवाल ने बताया कि गूगल सर्च इंजन पुरानी चीज हो गई है, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के कई सारे नए टूल्स लोगों को निशुल्क उपलब्ध है ,जिसका प्रयोग करके बच्चे अपने स्टडी मैटेरियल को समृद्ध कर सकते हैं। जहां गूगल सर्च इंजन का प्रयोग करने पर कई सारे लिंक मिल जाते हैं, जिसमें बच्चों को कन्फ्यूजन बना रहता है ,वही नए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के टूल्स का विश्लेषण और सूचनाए, डाटा कहीं अधिक सटीक सहज और ग्राह्य है। असिस्टेंट प्रोफेसर इतिहास विभाग नसरुल मुस्तफा जी ने वार्ता के क्रम में बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से नई चुनौतियां भी सामने आ रही है, सबसे बड़ी चुनौती यह है कि हम लोग तकनीक पर हद से ज्यादा आश्रित हो चुके हैं, मानवीय ज्ञान सोचने की शक्ति कमजोर हो रही है। महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर अभय श्रीवास्तव ने इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए राजनीति विज्ञान विभाग का आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि क्योंकि तकनीक इंसानों के द्वारा बनाई गई है अतः आर्टिफिशियल और नेचुरल इंटेलिजेंस की लड़ाई में हमेशा नेचुरल इंटेलिजेंस को एक्टिव होकर जीतना ही होगा। इस कार्यक्रम में असिस्टेंट प्रोफेसर राजनीति विज्ञान विभाग डॉक्टर रत्नाकर पांडे, प्रोफेसर भारत भूषण द्विवेदी, डा. उमरा जमाल, विनोद वर्मा, दीपक देव तिवारी, अजय द्विवेदी, गिरीश चंद्र मिश्र, उपस्थितरहे।




