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उत्तर प्रदेश

विधायक खेल महाकुंभ प्रतियोगिता का भव्य तरीके से हुआ समापन समारोह का आयोजन

शिव जी राम के द्वारा सामाजिक व्यवस्था का सूत्रपात किया
कण कण में व्याप्त श्रीराम विश्व सभ्यता के प्रस्थान बिंदु हैं। भगवान शिव जी ने प्रभु श्रीराम के माध्यम से मानव जाति को एक सुसभ्य सामाजिक संरचना का संदेश प्रेषित किया है। जहां भगवान शिव जी सामाजिक व्यवस्था के नियंता हैं, वहीं प्रभु श्रीराम एक आदर्श सामाजिक व्यवस्था के सूत्रधार हैं। नियंता द्वारा सुव्यवस्था की मानव श्रृंखला रची गई है जिसके निमित्त भगवान विष्णु के अवतार प्रभु श्रीराम को मानव जनित अनंत परीक्षाओं से गुजरना पड़ता है। रावण के अंत हेतु मनुष्य रूप में जन्म लेना पड़ता, इसलिए भगवान विष्णु जी ने श्रीराम का रूप धारण किया। वे पालनकर्ता हैं। राम शाश्वत हैं।
भारतीय शास्त्रों में वेदों का गहन अवलोकन करें तो ऋग्वेद में प्रभु श्रीराम का उल्लेख मिलता है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि ऋग्वेद में उल्लेखित श्री राम, रामायण के राम ही हैं या नहीं। ऋग्वेद में राम के नाम का उल्लेख एक-दो स्थानों पर मिलता है। ऋग्वेद में राम के नाम के एक प्रतापी और धर्मात्मा राजा का उल्लेख है। ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार राजा में देवत्व के गुण होते हैं तभी वह जन प्रिय, लोक प्रिय और न्याय प्रिय होता है।
ऋग्वेद में प्रभु श्रीराम के अलावा, राजा इक्ष्वाकु और राजा दशरथ के नाम भी मिलते हैं। ऋग्वेद में माता सीता का उल्लेख भी मिलता है, जिसे कृषि की देवी कहा गया है। माता सीता सभ्यता के उत्कर्ष में खेतिहर समाज की संकल्पना को मूर्त स्वरूप प्रदान करती हैं।
महर्षि वाल्मीकि ने संस्कृत में रामायण महाकाव्य रचा वहीं गोस्वामी तुलसीदास जी ने श्रीरामचरितमानस की रचना कर अवधी बोली को, भाषाई गौरव प्रदान किया। श्रीरामचरित मानस में ष् रामष् शब्द 1443 बार वर्णन है। श्रीरामचरित मानस में ष् सीता ष् शब्द – 147 बार वर्णन है। श्री रामचरित मानस में ष् जानकी ष् शब्द 69 बार वर्णन है। श्री रामचरित मानस में ष् बैदेही ष् शब्द 51 बार वर्णन है।
रामचरित मानस में श्बड़भागीश् शब्द 58 बार आया है। मानस में श्कोटिश् शब्द 125 बार आया है।
रामचरित मानस में श्एक बारश् शब्द 18 बार आया है। रामचरित मानस में श्मंदिरश् शब्द 35 बार आया है। रामचरित मानस में श्मरमश् शब्द 40 बार आया है। रामचरित मानस में कुल श्लोक संख्या 27 है। रामचरित मानस में कुल चौपाई संख्या 4,608 है। मानस में कुल दोहा संख्या 1,074 है। मानस में कुल सोरठा संख्या 207 है। मानस में कुल छंद संख्या 86 है। कहने का अभिप्राय यह है कि विभिन्न काव्यात्मक प्रतिमानों पर रामकथा को सुंदरतम रूप में परोसने का कार्य गोस्वामी तुलसीदास जी ने श्रीरामचरित मानस के द्वारा किया। राम कथा वही, प्रभु श्रीराम भी वही, जिस तरह जिसका भाव रहता है, प्रभु श्रीराम को वह उसी तरह देखता है। उनका भी आशीर्वाद उसी रूप में संबंधित भक्त प्राप्त करता है।
लेखक विनय कांत मिश्र/दैनिक बुद्ध का संदेश

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