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गोण्डा : आखिर क्यों परसपुर पुलिस आरोपियों पर है मेहरबान

गम्भीर धाराओं में मुकदमा दर्ज होने के बाद भी नहीं हो रही गिरफ्तारी

दैनिक बुद्ध का संदेश
गोण्डा। आखिर क्यों न उठे कानून व्यवस्था पर सवाल जब एसपी और डीआईजी कार्यालय के चक्कर काटते काटते घिस जाती है पीड़ितों की चप्पल और फिर टूट जाती है न्याय की आस। ताजा मामला परसपुर थाना क्षेत्र के ग्राम हृदय बैसन पुरवा का है जहां महीनों पहले रामानंद रास्ते पर पटाई कर रहे थे तभी विपक्ष के कुछ लोग वहां आ गए और रामानंद व उनके परिवार वालों पर हमला कर दिया जिसमे रामानंद को गहरी चोट आई जब घायल पीड़ित परसपुर थाने पर रिपोर्ट दर्ज कराने पहुंचे तो पुलिस ने रिपोर्ट नहीं दर्ज की उल्टे घायलों को ही हिरासत में ले लिया।

वही मारपीट में गंभीर रूप से घायल रामानंद को बिना रिपोर्ट दर्ज किए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेज दिया गया जहां डॉक्टरों ने हालत नाजुक देखते हुए जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया घायल की स्थिति अधिक गंभीर होने पर जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने भी मरीज को लखनऊ के लिए रेफर कर दिया जहां इलाज के दौरान रामानंद की मौत हो गई। जिसके बाद मृतक के भाई हरीराम ने हमला करने वाले व्यक्तियों को सजा दिलाने के लिए थाने से लेकर पुलिस अधीक्षक तक तक गुहार लगानी शुरू लेकिन पुलिस ने इस मामले में कोई संज्ञान नहीं लिया अंततः पीड़ित ने न्यायालय की शरण ली तब जाकर आरोपियों के खिलाफ धारा 147,149,323,504,120ठ व 304 के तहत केस दर्ज़ किया गया फिलहाल मुकदमा तो दर्ज़ हो गया और एक महीने का समय भी बीत गया लेकिन अभी तक थाना परसपुर की पुलिस मूक दर्शक बनी हुई है पुलिस आज तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं कर पाई। मृतक के भाई हरीराम ने बताया कि उसने तीन बार डीआईजी के यहां व तीन बार पुलिस अधीक्षक के यहां एप्लीकेशन दिया लेकिन फिर भी आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। अब सवाल ये उठता है कि प्रदेश की योगी सरकार कानून व्यवस्था के चाक चौबंद होने का दावा करते हुए अपनी पीठ थपथपाती है फिर ऐसे मामले आखिर क्यों सामने आते हैं।

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