प्लास्टिक के गैलन में नहीं मिलेगा डीजल, धान की नर्सरी सूखने की चिंता

दैनिक बुद्ध का संदेश/शशांक मिश्र
खेसरहा। पेट्रोल पंपों पर अब प्लास्टिक के गैलन में डीजल नहीं दिया जा रहा है। तेल कंपनियों के नए सुरक्षा निर्देशों के तहत केवल लोहे या अन्य स्वीकृत सुरक्षित कंटेनरों में ही डीजल उपलब्ध कराया जा रहा है। इस व्यवस्था से क्षेत्र के किसान परेशान हैं, क्योंकि अधिकांश किसान प्लास्टिक के डिब्बों में डीजल लेकर खेतों तक पहुंचाते थे।धान की नर्सरी तैयार होने के साथ ही किसानों को सिंचाई के लिए लगातार डीजल की आवश्यकता पड़ रही है। लेकिन नए नियम के कारण प्लास्टिक के डिब्बे लेकर पेट्रोल पंप पहुंच रहे किसानों को कर्मी वापस लौटा दे रहे हैं। किसानों का कहना है कि उनके पास लोहे के कंटेनर उपलब्ध नहीं हैं और बाजार में उनकी कीमत भी अधिक है।किसानों को आशंका है कि यदि जल्द कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई तो खेतों में तैयार धान की नर्सरी सूख सकती है। इसका सीधा असर रोपाई और फसल उत्पादन पर पड़ेगा। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि खेती के मौसम को देखते हुए कोई व्यावहारिक समाधान निकाला जाए, ताकि सिंचाई कार्य प्रभावित न हो और किसानों को समय पर डीजल मिल सके।जिला पूर्ति अधिकारी देवेन्द्र कुमार सिंह ने बताया कि सुरक्षा मानकों के तहत प्लास्टिक के गैलन में डीजल देने पर रोक लगाई गई है। उन्होंने कहा कि डीजल ज्वलनशील पदार्थ है और प्लास्टिक कंटेनरों में इसके परिवहन से दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। इसलिए केवल सुरक्षित एवं निर्धारित मानकों वाले कंटेनरों में ही डीजल उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने किसानों से सुरक्षा नियमों का पालन करने की अपील करते हुए कहा कि जनपद में डीजल की कोई कमी नहीं है और सभी पेट्रोल पंपों पर पर्याप्त मात्रा में डीजल उपलब्ध है।




