पराली जलाने पर सख्ती, जागरूकता और कार्रवाई दोनों पर जोर

दैनिक बुद्ध का संदेश
सिद्धार्थनगर। जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जी एन की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में जनपद स्तरीय अधिकारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य रबी फसल के अवशेष (पराली) जलाने से होने वाले प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना और पर्यावरण संरक्षण के लिए ठोस रणनीति तैयार करना रहा। बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि पराली जलाने से वायु प्रदूषण में वृद्धि होती है, जिससे न केवल पर्यावरण बल्कि आमजन के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और श्वसन रोगियों के लिए यह बेहद खतरनाक है। उन्होंने यह भी बताया कि इससे मिट्टी की उर्वरता भी कम होती है। जिलाधिकारी ने कृषि विभाग को निर्देश दिया कि किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के वैकल्पिक उपायों जैसे हैप्पी सीडर और सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम के उपयोग के प्रति जागरूक किया जाए। साथ ही इन यंत्रों पर मिलने वाले अनुदान की जानकारी भी किसानों तक पहुंचाई जाए, ताकि वे पराली जलाने से बचें। ग्राम स्तर पर व्यापक जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए गए, जिसमें ग्राम प्रधान, लेखपाल, कृषि कर्मी और स्थानीय प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। किसानों को पराली जलाने से होने वाले नुकसान और इसके विकल्पों के बारे में विस्तार से बताया जाएगा। राजस्व और पुलिस विभाग को निर्देशित किया गया कि वे पराली जलाने की घटनाओं पर कड़ी निगरानी रखें। यदि कोई किसान ऐसा करते हुए पाया जाता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही गांवों में निगरानी समितियों के गठन के भी निर्देश दिए गए। शिक्षा विभाग को भी निर्देश दिया गया कि विद्यालयों के माध्यम से विद्यार्थियों के जरिए जागरूकता अभियान चलाया जाए, ताकि यह संदेश समाज के हर वर्ग तक पहुंचे। प्रचार-प्रसार के लिए लाउडस्पीकर, पोस्टर और सोशल मीडिया का उपयोग करने पर भी जोर दिया गया। बैठक के अंत में जिलाधिकारी ने कहा कि प्रदूषण मुक्त वातावरण सुनिश्चित करना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है और इसके लिए जनभागीदारी अत्यंत आवश्यक है। इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी श्री बलराम सिंह, अपर जिलाधिकारी, जिला कृषि अधिकारी, जिला पंचायत राज अधिकारी सहित पुलिस विभाग और अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।




