वन हैं तो जल हैः इकोसिस्टम बचाने में वनों की अहम भूमिका- डीएफओ नीला एम.

दैनिक बुद्ध का संदेश
सिद्धार्थनगर। विश्व जल दिवस के अवसर पर प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) नीला एम. ने जनपदवासियों से जल संरक्षण और वन संरक्षण के प्रति जागरूक होने की अपील की। उन्होंने कहा कि “वन हैं तो जल है” केवल एक नारा नहीं, बल्कि पारिस्थितिकी संतुलन का मूल सिद्धांत है।डीएफओ ने बताया कि वन विभाग द्वारा जल संरक्षण, जलभराव क्षमता बढ़ाने और जल संसाधनों के वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए लगातार कार्य किए जा रहे हैं। विशेष रूप से वृक्षारोपण और जल ग्रहण क्षेत्र प्रबंधन के माध्यम से भूमि की जल सोखने की क्षमता बढ़ाई जा रही है, जिससे भूजल स्तर में सुधार होता है।उन्होंने कहा कि वनों में मौजूद पेड़-पौधे और झाड़ियां मिट्टी के कटाव को रोकती हैं और वर्षा जल को बहने से रोककर उसे जमीन में समाहित करने में मदद करती हैं। इससे न केवल जल संरक्षण होता है, बल्कि जल प्रदूषण भी कम होता है।डीएफओ नीला एम. ने यह भी बताया कि जिला गंगा समिति के माध्यम से नदियों की स्वच्छता और जल संरक्षण के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, जिससे आमजन को इस दिशा में प्रेरित किया जा सके।उन्होंने अंत में जनपदवासियों से अपील की कि इस विश्व जल दिवस पर सभी लोग मिलकर वन संरक्षण और जल संरक्षण का संकल्प लें, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखा जा सके।




