जगदम्बिका पाल ने कहा आर्थिक स्थिरता, किसान सुरक्षा और गरीब कल्याण पर सरकार की प्रतिबद्धता

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नई दिल्ली। लोकसभा में वर्ष 2025-26 के द्वितीय बैच की वित पर चर्चा के दौरान डुमरियागंज से सांसद जगदम्बिका पाल ने कहा कि यह प्रस्ताव सरकार की दूरदर्शी आर्थिक नीति और संकट प्रबंधन क्षमता का प्रमाण है। उन्होंने बताया कि द्वितीय अनुपूरक अनुदान का कुल आकार लगभग ₹2.81 लाख करोड़ है, जिसमें करीब ₹2 लाख करोड़ का शुद्ध नकद व्यय शामिल है, जबकि शेष राशि मंत्रालयों की बचत और बढ़ी हुई प्राप्तियों से पूरी की जाएगी। सांसद पाल ने कहा कि पश्चिम एशिया में ईरान-इज़राइल संघर्ष के कारण वैश्विक तेल कीमतों में 65-70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 88-119 डॉलर प्रति बैरल तक उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। इससे उर्वरक गैस, खाद्यान्न परिवहन और निर्यात पर दबाव पड़ा। ऐसी स्थिति में केंद्र सरकार ने ₹1 लाख करोड़ के म्बवदवउपब ैजंइपसपेंजपवद थ्नदक के माध्यम से अर्थव्यवस्था को संभावित भू-राजनीतिक झटकों से सुरक्षित करने की पहल की है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 से पहले भारत की अर्थव्यवस्था को अक्सर “फ्रैजाइल” कहा जाता था, लेकिन आज भारत की नॉमिनल जीडीपी लगभग तीन गुना बढ़कर ₹357 लाख करोड़ हो चुकी है और विदेशी मुद्रा भंडार 686 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। सांसद ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आर्थिक स्थिरता और स्पष्ट नीतिगत दिशा का परिणाम बताया। कृषि क्षेत्र का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि किसानों को राहत देने के लिए उर्वरक सब्सिडी बढ़ाकर ₹1.86 लाख करोड़ कर दी गई है, जिससे लगभग 14 करोड़ किसानों को महंगे इनपुट की मार से बचाया जा सकेगा। साथ ही ₹19,230 करोड़ की अतिरिक्त राशियोजनाओं के माध्यम से किसानों को उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत आज 81 करोड़ लाभार्थियों को प्रति व्यक्ति 5 किलोग्राम मुफ्त अनाज दिया जा रहा है, जिससे देश की खाद्य सुरक्षा मजबूत हुई है और गरीब वर्ग को बड़ी राहत मिली है। सांसद पाल ने यह भी कहा कि ₹38,585 करोड़ का राज्यों को हस्तांतरण सहकारी संघवाद की भावना को मजबूत करता है। इससे पंचायतों, शहरी निकायों, स्वास्थ्य सेवाओं और आपदा प्रबंधन क्षमता को सुदृढ़ बनाने में मदद मिलेगी। अपने वक्तव्य के अंत में जगदम्बिका पाल ने कहा कि यह अनुपूरक अनुदान केवल वित्तीय प्रावधान नहीं है, बल्कि “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य की दिशा में आर्थिक स्थिरता, किसान सशक्तिकरण और गरीब कल्याण की सरकार की प्रतिबद्धता का स्पष्ट संकेत है।




