भगवान विष्णु महापुराण कथा विष्णु महायज्ञ धर्म स्थल कार्यक्रम

दैनिक बुद्ध का संदेश
बांसी। भगवान् बुद्ध की पावन धरा पर स्थित महोखवा समय माता मन्दिर पर कथा व्यास धीरज भाई जी महाराज ब्याकरणाचार्य की देखरेख में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का समापन दिवस भक्ति और अध्यात्म के अनुपम संगम के रूप में बृहस्पतिवार को निर्विघ्न संपन्न हुआ। कथा व्यास ने कहा कि मनुष्य के जीवन का उद्धार धन या भौतिक सुखों से नहीं, बल्कि गुरु के प्रति अटूट निष्ठा और गौ-माता की निस्वार्थ सेवा से ही संभव है। उन्होंने गुरु और गोविन्द को दो दिव्य स्तंभ बताते हुए कहा कि गुरु ही शिष्य को अज्ञान के अंधकार से निकालकर भगवान के चरणों तक पहुँचाते हैं। सच्ची भक्ति का अर्थ पूर्ण समर्पण है। सनातन धर्म की महिमा बताते हुए महाराज जी ने गौ-सेवा को मोक्ष का द्वार बताते हुए कहा कि जिस घर में गौ-सेवा का भाव होता है, वहाँ सुख-शांति और समृद्धि का वास रहता है। कथा के दौरान सुदामा और श्रीकृष्ण की मित्रता का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि भगवान वस्तु या धन के नहीं, बल्कि भक्त के सच्चे भाव के भूखे होते हैं। जो व्यक्ति पूर्ण विश्वास के साथ स्वयं को भगवान को समर्पित कर देता है, उसकी झोली कभी खाली नहीं रहती।अंत में महाराज जी ने अपने जीवन में सरलता, निष्कपटता, गुरु आज्ञा का पालन व गौ सेवा को अपनाकर जीवन सफल बनाने का आह्वान किया। कथा में यजमान फूलचंद जायसवाल सहित बडी संख्या में श्रोतागंण उपस्थित रहे।




