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मृतक धनराज के परिजनों से मिला आरएसएस का प्रतिनिधि मंडल, विधायक ने दी दो लाख की आर्थिक सहायता

दैनिक बुद्ध का संदेश
उतरौला/बलरामपुर। कोतवाली क्षेत्र के अहिरौला में युवक धनराज की मौत के बाद सोमवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रतिनिधि मंडल ने गांव में जाकर मृतक के परिजनों से मुलाकात कर उन्हे हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। विभाग कार्यवाह अमित कुमार, जिला कार्यवाह अभिमन्यु, रूपेश कुमार, प्रमोद कुमार, कपिल कुमार, गोपालजी व महंथ अरुण दास ने परिवार जनों व ग्रामीणों से पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। ग्रामीणों को संगठित रहने की सलाह देते हुए कहा कि अब का समय आततायियों और आतंक फैलाने वालों को दंड देने दिलाने का है। प्रशासन को पूरे मामले में निष्पक्ष होकर कार्रवाई करने का निर्देश देते हुए कहा कि अगर पीड़ित पक्ष को न्याय दिलाने में लापरवाही की गई तो मुख्यमंत्री से मिलकर अधिकारियों को दंडित कराया जाएगा। विधायक राम प्रताप वर्मा ने पीड़ित परिवार को दो लाख रुपयों की आर्थिक सहायता देते हुए कहा कि गांव में घटी घटना न केवल दुस्साहसिक है वरन पीड़ादायक भी है। वह अपनी पार्टी के साथ पूरी तरह परिवार के साथ खड़े हैं और जरूरत पड़ने पर वह हर समय परिवार के साथ खड़े रहेंगे। भाजपा जिलाध्यक्ष संदीप वर्मा ने भी परिजनों को सांत्वना देते हुए कहा कि इस मामले में जिन-जिन अधिकारियों की उदासीनता और गैर जिम्मेदारी सामने आई है उन सबकी शिकायत उच्च अधिकारियों से करने के साथ प्रदेश नेतृत्व के संज्ञान में लाया जाएगा। कोतवाली क्षेत्र के बभनी बुजुर्ग के अहिरौला में 27 मई को हुई घटना में प्रशासन की लापरवाही और दबंगों को प्रश्रय देने वालों का चिट्ठा अब सामने आने लगा है। पुलिस शुरू से ही इस मामले में लीपापोती का प्रयास कर रही थी। दबंगों और पुलिस के बीच तालमेल बनाने का जिम्मा गैंडास बुजुर्ग थाने में तैनात एक होमगार्ड कर रहा था। इसी तालमेल के चलते ही पुलिस ने मुकदमा दर्ज करते समय उस हथियार का जिक्र तक नहीं होने दिया जिसके घातक वार से धनराज और मीना देवी के सिर पर चोटें आईं थी। लोहे के रॉड में बाईक की चेन स्पॉकेट का नुकीला टुकड़ा जोड़कर उसे फरसे का आकार दिया गया था। जिसका घातक वार धनराज के लिए मृत्यु दायक साबित हुआ। दबाव में आई पुलिस ने आनन फानन मे उसी दिन चार आरोपियों को पकड़ कर जेल भेजने की कवायद की। पुलिस ने लकड़ी के डंडे और बांस की बरामदगी दिखा दी लेकिन आरोपियों से उस नुकीले और धारदार हथियार के बारे में न तो पूछताछ की न ही उसे बरामद करने की कोशिश ही की। बाद में पकड़े गए दो अन्य आरोपियों से भी यह पता लगाने की कोशिश नहीं की कि वह औजार कहां है। हांलाकि अभी एक अभियुक्त अभी भी पुलिस की पकड़ से दूर है जिसकी तलाश में चार टीमें लगाने का दावा सीओ राघवेंद्र सिंह कर रहे हैं। आरोपियों के घर की भरपूर सुरक्षा पुलिस कर रही है लेकिन हथियार की बरामदगी के लिए घर की तलाशी लेने का ध्यान पुलिस को आठ दिन बाद भी नहीं है। इतनी बड़ी घटना के बाद जब पूरा मामला पुलिस केस बन गया था धनराज को उतरौला के एक निजी अस्पताल में लाकर उसके सिर पर टांके लगाए गये जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है, इसके बावजूद पुलिस ने उस निजी अस्पताल के संचालक से यह भी नहीं पूछने की जहमत उठाई कि पुलिस को मामले की जानकारी समय से उपलब्ध क्यों नहीं कराई गई। निजी अस्पताल में हालत बिगड़ने के बाद उसे सीएचसी रेफर किया गया, सीएचसी से उसे जिला चिकित्सालय भेजने के दौरान रक्त ज्यादा निकल जाने से धनराज की हालत और भी चिंताजनक हो गई थी। निजी अस्पताल और दबंगों की मिलीभगत ने यहां भी सेटिंग कर रखी थी। घटना में कोतवाली उतरौला और गैंड़ास बुजुर्ग थाने की घोर लापरवाही की बातें भी सामने आई हैं। जब आरोपी लगातार चार महीनों से क्षेत्र में घूम घूम कर आतंक मचा रहे थे और उनकी शिकायत भी हो रही थी तो पुलिस किस दबाव में उनके विरुद्ध कार्रवाई नहीं कर रही थी इस पर अधिकारियों को सूक्ष्मता से जांच करनी होगी। सीओ राघवेंद्र सिंह का कहना है कि फिलहाल उनकी प्राथमिकता पीड़ित पक्ष को न्याय दिलाना और शांति व्यवस्था बनाए रखने की है। सभी बिंदुओं पर विस्तृत जांच की जाएगी और जिनकी भी संलिप्तता या लापरवाही मिलेगी सबके खिलाफ कार्रवाई होगी।

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