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उत्तर प्रदेशसिद्धार्थनगर

दक्षिण एशिया में लोकतंत्र की चुनौती पर हुआ गंभीर विमर्श

दैनिक बुद्ध का संदेश
सिद्धार्थनगर।दक्षिण एशिया में लोकतंत्र पर गहराता संकट और भारत की भूमिका: चुनौतियां एवं संभावनाएं, विषय पर चंद्रावती नर्सिंग कॉलेज,पकड़ी,गोरखपुर रोड में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन हुआ। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रक्षा मामलों के विशेषज्ञ दिल्ली विश्वविद्यालय के अध्यापक डॉक्टर संजीव श्रीवास्तव जी रहे , कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के तौर पर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से डॉ रवि रमेश चंद्र शुक्ला, विशिष्ट अतिथि की भूमिका में डॉ पुनीत गौड़ भारतीय वैश्विक परिषद ने दक्षिण एशिया में लोकतंत्र की समस्या पर अपना अमूल्य विचार प्रस्तुत किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य बुद्ध विद्यापीठ पीजी कॉलेज प्रोफेसर अभय कुमार श्रीवास्तव ने और मंच संचालन का कार्य प्रोफेसर शक्ति जायसवाल राजनीति विज्ञान विभाग के द्वारा किया गया। डॉ रत्नाकर पांडे राजनीति विज्ञान बुद्ध विद्यापीठ पीजी कॉलेज में अतिथियों का स्वागत एवं परिचय कराया। इस कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में प्रथम वक्ता के तौर पर दिल्ली से बीबीसी के पैनलिस्ट कमर आगा साहब ने ऑनलाइन मोड में अपना व्याख्यान दिया। कमर आगा जी ने बताया कि दक्षिण एशिया में भारत की विदेश नीति युद्ध से बचने की रही है , भारत अपने पड़ोसी देशों पर किसी भी प्रकार का फर्स्ट स्ट्राइक नहीं करना चाहता है। भारत की नीति रही है कि पाकिस्तान के साथ युद्ध और वार्ता एक साथ नहीं चल सकते। जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ रवि रमेश चंद शुक्ला ने बताया कि भारत नैसर्गिक रूप से सबसे पहले आता है ,इसलिए बड़े भाई होने की भारत की आलोचना बेतुका है। उन्होंने वेदों में कहीं श्लोकों के द्वारा बताया कि भारत दुनिया का सबसे प्राचीनतम लोकतंत्र है , भारत और भूटान दो ऐसी सभ्यताएं और संस्कृति रही है, जो हिंसा के द्वारा पैदा नहीं हुई है, इसके अतिरिक्त शेष अधिकांश दक्षिण एशियाई देश हिंसा की उपज माने जाते हैं। जहां तक बात नेपाल की है तो जब तक वहां अपनी प्राचीन सभ्यता और संस्कृति की जड़े मजबूत थी, तब तक नेपाल खुशहाल था, माओवाद और उसके बाद के दौर में एक संक्रमण के दौर से नेपाल गुजर रहा है। नई दिल्ली से आए रक्षा विशेषज्ञ दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉक्टर संजीव श्रीवास्तव ने बताया की भारत में पड़ोसियों के साथ सदैव सच्चे मित्र के तौर पर संबंध को निभाया है। श्रीलंका में आर्थिक संकट रहा हो या नेपाल में भूकंप, बांग्लादेश में लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करना रहा हो या शेख हसीना को संरक्षण देना, भारत ने सदैव सहअस्तित्व और लोकतंत्र को बचाने का प्रयास किया है। नई दिल्ली के भारतीय वैश्विक परिषद से से आई डॉक्टर पुनीत गौड़ नहीं बताया कि भारतीय वैश्विक परिषद किस तरह से भारत के ग्रामीण अंचल में भी बौद्धिक संगोष्ठियों को प्रोत्साहित कर रही है। इसके साथ ही युवाओं को छात्रवृत्ति के माध्यम से उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित भी कर रही है। मंच संचालन कर रहे प्रोफेसर शक्ति जायसवाल ने कार्यक्रम के रूपरेखा प्रस्तुत की और उन्होंने बताया कि आज के दिन दो तकनीक सत्र चलेंगे, जिसमें पहले तकनीक सत्र दक्षिण एशिया में लोकतंत्र की समस्या पर एवं दूसरा तकनीक सत्र दक्षिण एशिया में लोकतंत्र संकट पर भारत के नेतृत्व की भूमिका पर विचार करेगा। प्राचार्य प्रोफेसर अभय कुमार श्रीवास्तव ने सभी आगंतुकों को हार्दिक आभार एवं अभिनंदन व्यक्त किया। इस कार्यक्रम में डॉक्टर सोवरन सिंह प्रिंसिपल चंद्रावती नर्सिंग कॉलेज, एचआरपीजी से डॉक्टर शशिकांत राव, बापू पीजी कॉलेज से डॉक्टर करुणेन्द्र सिंह, डॉक्टर भानु गुप्ता, सुदृष्टि कॉलेज बलिया से विवेक कुमार राय, अपने कॉलेज से दिग्विजय जी, अखिलेश जी, महेंद्र सोनी, बासी रतन सिंह कॉलेज से डॉक्टर हंसराज कुशवाहा ने दक्षिण एशिया में लोकतंत्र की समस्या पर अपने विचार रखें। कार्यक्रम में आकांक्षी मिश्रा, शुभम मिश्रा, राघवेंद्र सिंह, विनोद जी, प्रोफेसर भारत भूषण द्विवेदी, नसरुल मुस्तफा खान, डॉ अजय द्विवेदी, डॉ सुनीता किशोर, गिरिजेश चंद्र मिश्राएवं विद्यार्थीगण उपस्थित रहे।

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