खुदाई के दौरान प्राप्त 331 अवशेष रत्न पिपरहवा का हिस्सा, हक और अधिकार-केशव प्रसाद मौर्य

दैनिक बुद्ध का संदेश
सिद्धार्थनगर। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि पिपरहवा में खुदाई के दौरान प्राप्त 331 अवशेष रत्न पिपरहवा का हिस्सा, हक और अधिकार है। उन्हें कपिलवस्तु स्थित राजकीय बौद्ध संग्रहालय में लाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे। ये बातें उप मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को सिद्धार्थनगर महोत्सव में कहीं। उन्होंने कहा कि पिपरहवा-कपिलवस्तु को वैश्विक मानचित्र पर स्थापित कर इसे दुनिया का सबसे बड़ा बौद्ध तीर्थ स्थल बनाया जाएगा। उप मुख्यमंत्री शुक्रवार को नेपाल सीमा से सटे भगवान बुद्ध की क्रीडास्थली कपिलवस्तु-पिपरहवा पहुंचे। यहां उन्होंने मुख्य स्तूप का दर्शन किया, राजकीय बौद्ध संग्रहालय का जायजा लिया और भंतों से संवाद किया। इसके बाद वह जिला मुख्यालय पर आयोजित सिद्धार्थनगर महोत्सव के तीसरे दिन के कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बौद्ध देशों में जाने वाले भारतीय प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई करने का दायित्व सौंपा तो यह केवल जिम्मेदारी नहीं बल्कि गौरव का क्षण था। उन्होंने कहा कि यह जानकर गर्व होता है कि भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष रत्न पिपरहवा में खुदाई के दौरान प्राप्त हुए, जो उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले की अमूल्य धरोहर हैं। उसी दिन से उन्होंने पिपरहवा के मुख्य स्तूप के दर्शन का मन बना लिया था। डिप्टी सीएम ने कहा कि भगवान बुद्ध के शांति, अहिंसा और करुणा के संदेश मानवता के लिए कालातीत हैं। आज जब दुनिया संघर्ष और हिंसा से जूझ रही है, तब बुद्ध के विचार पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गए हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री अक्सर कहते हैं कि भारत भाग्यशाली है, जिसने दुनिया को बुद्ध दिया जबकि कई देशों ने दुनिया को युद्ध दिए। इससे पहले सांसद जगदंबिका पाल ने उप मुख्यमंत्री के समक्ष पिपरहवा से जुड़े 331 अवशेष रत्नों को कपिलवस्तु स्थित बौद्ध संग्रहालय में स्थापित करने की पुरजोर मांग रखी।




