अंग्रेजों के खिलाफ महाविद्रोह में बिरसा मुंडा का विशेष योगदान-दयाशंकर मिश्र दयालु

सिद्धार्थनगर। मुख्य अतिथि मा0राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), आयुष खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग, उ0प्र0 सरकार दयाशंकर मिश्र दयालु की उपस्थिति में भगवान बिरसा मुण्डा जयन्ती के अवसर पर अम्बेडकर सभागार में गोष्ठी सम्पन्न हुई। मुख्य अतिथि दयाशंकर मिश्र दयालु ने कहा कि जनताति गौरव दिवस के अवसर पर सभी को बधाई दिया। प्रदेश सरकार सरदार बल्लभ भाई पटेल एवं बिरसा मुण्डा की जयन्ती के अवसर पर पूरे प्रदेश में एकता दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। बिरसा मुण्डा एक भारतीय आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी और मुंडा जनजाति के लोक नायक थे। उन्होंने ब्रिटिश राज के दौरान 19वीं शताब्दी के अंत में बंगाल प्रेसीडेंसी (अब झारखंड) में हुए एक आदिवासी धार्मिक सहस्राब्दी आंदोलन का नेतृत्व किया, जिससे वह भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में एक महत्वपूर्ण व्यक्ति बन गए। भारत के आदिवासी उन्हें भगवान मानते है। 19वीं शताब्दी के अंत में अंग्रेजों ने कुटिल नीति अपनाकर आदिवासियों को लगातार जल-जंगल-जमीन और उनके प्राकृतिक संसाधनों से बेदखल करने लगे। हालाँकि आदिवासी विद्रोह करते थें, लेकिन संख्या बल में कम होने एवं आधुनिक हथियारों की अनुपलब्धता के कारण उनके विद्रोह को कुछ ही दिनों में दबा दिया जाता था। यह सब देखकर बिरसा मुंडा विचलित हो गए, और अंततः 1895 में अंग्रेजों की लागू की गयी जमींदारी प्रथा और राजस्व-व्यवस्था के खिलाफ़ लड़ाई के साथ-साथ जंगल-जमीन की लड़ाई छेड़ दी। यह मात्र विद्रोह नहीं था। यह आदिवासी अस्मिता, स्वायतत्ता और संस्कृति को बचाने के लिए संग्राम था। पिछले सभी विद्रोह से सीखते हुए, बिरसा मुंडा ने पहले सभी आदिवासियों को संगठित किया फिर छेड़ दिया अंग्रेजों के खिलाफ़ ़ महाविद्रोह किया। प्रधानमंत्री ने महापुरूषों, नायको के बलिदानों को याद किया जा रहा है। बिरसा मुंडा की समाधि राँची में कोकर के निकट डिस्टिलरी पुल के पास स्थित है। वहीं उनका स्टेच्यू भी लगा है। उनकी स्मृति में राँची में बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार तथा बिरसा मुंडा अंतर्राष्ट्रीय विमानक्षेत्र भी है। क्षेत्रीय अध्यक्ष अनुसूचित जनजाति मोर्चा सुखराम गौड़ ने कहा कि भारतीय इतिहास में बिरसा मुंडा एक ऐसे नायक थे जिन्होंने भारत के झारखंड में अपने क्रांतिकारी चिंतन से उन्नीसवीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में आदिवासी समाज की दशा और दिशा बदलकर नवीन सामाजिक और राजनीतिक युग का सूत्रपात किया। काले कानूनों को चुनौती देकर बर्बर ब्रिटिश साम्राज्य को सांसत में डाल दिया। भगवान बिरसा मुंडा न केवल एक स्वतंत्रता सेनानी थे, बल्कि एक महान समाज सुधारक भी थे। उन्होंने आदिवासी समाज में व्याप्त अंधविश्वास, जातिगत भेदभाव, मादक द्रव्यों के सेवन और अन्य सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध जागरूकता फैलाई। उन्होंने अपने अनुयायियों को शिक्षा के महत्व पर ज़ोर दिया और एकता का उपदेश दिया। बिरसा मुंडा ने बिरसाइत नामक एक धार्मिक आंदोलन भी चलाया, जिसमें उन्होंने अपने अनुयायियों को आचरण की शुद्धता, सादगी और सत्य का पालन करने के लिए प्रोत्साहित किया। अनुसूचित जनजाति के लोगो को प्रमाण-जारी नही हो रहा है। उच्च स्तर पर अवगत कराकर जारी कराये। जिलाध्यक्ष भाजपा कन्हैया पासवान ने बिरसा मुण्डा के 150वीं जयन्ती पूर्ण होने के अवसर पर भगवान गौतम बुद्ध की धरती पर मा0 मंत्री जी को बधाई देता हूॅ। उन्होंने कहा कि भारत सरकार के केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा 10 नवंबर 2021 को आयोजित बैठक में आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को याद करने के लिए बिरसा मुंडा की जयंती 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में घोषित किया है।इस दिन को भारत के एक वीर स्वतंत्रता सेनानी को याद किया जाता है। उ0प्र0 सरकार द्वारा महापुरूषों का सम्मान करने का काम कर रही है। सभी विधानसभाओ में कार्यक्रम पदयात्रा आयोजित हो रहा है। बिरसा मुण्डा ने देश के लिए अपना जीवन समर्पित किया। इस अवसर पर प्रदेश कोषाध्यक्ष अनुसूचित जनजाति हीरालाल गौड़,जिला उपाध्यक्ष विनीत कमलापुरी,जिला महामंत्री विपिन सिंह, विजयकांत चतुर्वेदी,जिला मंत्री अजय उपाध्याय, फतेबहादुर सिंह,जिला मिडिया प्रभारी भाजपा निशांत पाण्डेय,जिला संयोजक निर्वाचन सचिदानंद चतुर्वेदी,आशीष शुक्ला,मंडल अध्यक्षगण अमित उपाध्याय,महेश वर्मा,सोनू गुप्ता,राकेश आर्या,संतोष शुक्ला,गगन श्रीवास्तव आदि लोग उपस्थित रहे।




