तुलसीपुर विकासखंड में नहीं थम रहा भ्रष्टाचार

बलरामपुर। तुलसीपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत चौहत्तर कला में भ्रष्टाचार की गंध अब आम लोगों तक पहुंच चुकी है। पंचायत सचिव योगेंद्र कुमार पर गंभीर आरोप लगे हैं कि उन्होंने हैंडपंप मरम्मत और रिबोर के नाम पर लाखों रुपये का बंदरबांट कर डाला है।सूत्रों के अनुसार, ग्राम पंचायत चौहत्तर कला में पंचायत सचिव ने हैंडपंपों के मरम्मत कार्यों का कागजी रिकॉर्ड तो पूरा तैयार कर दिया, परंतु जमीनी सच्चाई बिल्कुल उलट है। गांव में लगे अधिकांश हैंडपंप या तो खराब पड़े हैं या उनमें पानी की धार बेहद कमजोर है। इसके बावजूद कागजों में हैंडपंप मरम्मत और रिबोर पर लाखों रुपये खर्च दिखा दिए गए। चौंकाने वाली बात यह है कि मरम्मत और रिबोर का भुगतान “जुनैद सीमेंट एंड बिल्डिंग मटेरियल्स” नामक दुकान के माध्यम से किया गया है, जबकि उक्त दुकान सीमेंट, सरिया, गिट्टी और बालू की बिक्री करती है कृ हैंडपंप रिबोर से उसका कोई लेना-देना नहीं है। सवाल यह उठता है कि जब दुकान निर्माण सामग्री बेचती है, तो फिर हैंडपंप रिबोर के नाम पर लाखों रुपये का बिल कैसे स्वीकृत कर दिया गया? ग्रामवासियों का कहना है कि पंचायत सचिव द्वारा हर कार्य में मनमानी की जा रही है। हैंडपंपों की स्थिति देखकर साफ प्रतीत होता है कि मरम्मत कार्य केवल कागजों तक सीमित रहा, जबकि सरकारी धन की जमकर बंदरबांट की गई। ग्रामीणों ने इस भ्रष्टाचार की जांच की मांग उच्च अधिकारियों से की है। यह पहला मौका नहीं है जब पंचायत सचिव योगेंद्र कुमार का नाम भ्रष्टाचार में उछला हो। हाल ही में स्वतंत्र प्रभात में प्रकाशित एक अन्य रिपोर्ट में ग्राम पंचायत सोनपुर धुतकहवा में भी इन्हीं सचिव द्वारा नियम-कानूनों को ताक पर रखकर भारी-भरकम भुगतान किए जाने का मामला उजागर हुआ था। जब स्वतंत्र प्रभात संवाददाता ने पंचायत सचिव से इस मामले में संपर्क करने का प्रयास किया तो उन्होंने न तो मिलने की इच्छा जताई और न ही फोन पर कोई जवाब देना उचित समझा। उनका यह रवैया न केवल संदेह को गहरा करता है बल्कि उनकी कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। ग्राम पंचायतों में विकास के नाम पर चल रहे इस तरह के भ्रष्टाचार और कागजी खेल से सरकार की योजनाओं की साख पर भी आंच आ रही है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस पर क्या कार्रवाई करता है और क्या ग्राम पंचायत चौहत्तर कला के लोगों को न्याय मिलेगा या यह मामला भी फाइलों में ही दफन होकर रह जाएगा।




