जातिगत नहीं, आर्थिक आधार पर हो आरक्षण

बांसी। अधिवक्ता एवं अन्य नगरवासियों की बैठक की बार एसोसियेशन बाँसी के अध्यक्ष आदित्य प्रकाश त्रिपाठी की अध्यक्षता में हुई अधिवक्ताओं के मध्य भारत में प्रचलित आरक्षण नीति के विरोध में चर्चा हुयी अधिकांशतः अधिवक्ताओं एवं उपस्थित नगरवासियों ने आरक्षण नीति पर विरोध वार्ता करते हुये कहा कि सभी जातियों, वर्गों में गरीब और शोषित वंचित है जिन्हें भी आरक्षण की परिधि में लाते हुये सभी वर्गों के लिए आर्थिक स्थिति के आधार पर आरक्षण देने की बात किया गया। आज बताओ ने उप जिला अधिकारी को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भी सौंपा। अधिवक्ताओं के पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार बुधवार की देर शाम बैठक कर उप जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए कहा गया कि गरीब जाति नहीं व्यक्ति होता है आरक्षण गरीबों की आवश्यकता है जिन्हें प्रोत्साहन देकर हम आगे बढ़ा सकते हैं लेकिन गलत नीति के चलते पीढ़ी दर पीढ़ी को आरक्षण का लाभ प्रदान किया जाना उचित नहीं है। आज भारत में पूरे परिवार के उच्च पदों पर आसीन और अच्छी आय प्राप्त करने वाले लोगों को ही आरक्षण की सुविधा प्राप्त होती रही है जबकि उसी वर्ग के वास्तव में शोषित वंचित लोगों के परिवारों को आरक्षण का लाभ नहीं मिल पा रहा है वास्तविक रुप से शोषित वंचित लोग सभी जाति और धर्म में है इसलिए आरक्षण नीति में बदलाव करके सभी वर्गों के लोगों को आर्थिक आधार पर आरक्षण का लाभ दिया जावे साथ ही ऐसे समस्त लोगों के परिवार जो उच्च पद पर पदासीन है या राज्य विधान सभा, लोकसभा, राज्यसभा या अन्य उच्च पदों पर आसीन है. लोगों को या इनके परिवार को आरक्षण का लाभ न दिया जावे क्योंकि इन लोगों को आरक्षण का लाभ देने से उसी वर्ग के शोषित वंचित और आर्थिक रूप से कमजोर को कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। उपस्थित अधिवक्तागणों ने यह भी कहा कि संविधान निर्माता डा० वी०एन० राव साहब थे जबकि बोट की राजनीति के चलते तत्कालीन सरकार ने बाबा साहब भीम राव अम्बेडकर को ही संविधान निर्माता घोषित एवं प्रचारित किया। ऐसी स्थिति में सरकार द्वारा डा० बी०एन० राव साहब को संविधान निर्माता घोषित किया जावे तथा मरणोपरान्त भारत रत्न प्रदान किया जावे। इस दौरान सभी उपस्थित जनसमूह ने अनिल कुमार मिश्र एडवोकेट मध्य प्रदेश को समर्थन दिया उनके सवालों को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दिया जावे इसका मांग करते हुए राष्ट्रपति के नाम उप जिलाधिकारी को वज्ञापन सौंपा। इस दौरान ज्ञापन सौंपने वालों में अधिकांश पदाधिकारी के साथ भारी संख्या में लोग उपस्थित रहे।




