श्रावस्ती में वियतनामी बौद्ध अनुयायियों ने गंध कुटी पर की पूजा-अर्चना

श्रावस्ती। बुद्ध की तपोस्थली श्रावस्ती के कटरा स्थित गंध कुटी पर वियतनाम से आए बौद्ध अनुयायियों ने अपने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर बौद्ध भिक्षु भंवरानंद की अध्यक्षता में विशेष अनुष्ठान संपन्न हुआ। भंवरानंद ने प्रवचन के दौरान कहा कि जो व्यक्ति दस पारमिताओं का पूर्ण पालन करता है, वही बोधिसत्व कहलाता है। जब बोधिसत्व दस भूमियों कृ मुदिता, विमला, दीप्ति, अर्चिष्मती, सुदुर्जया, अभिमुखी, दूरंगमा, अचल, साधुमती और धम्म-मेघा कृ को प्राप्त कर लेता है, तब वह बुद्ध कहलाता है। उन्होंने कहा कि बुद्ध बनना ही बोधिसत्व के जीवन की पराकाष्ठा है, जिसे बोधि अर्थात ज्ञान कहा गया है। बुद्ध शाक्यमुनि अकेले बुद्ध नहीं हैं; उनके पहले भी अनेक बुद्ध हुए हैं और भविष्य में भी होंगे। भंवरानंद ने कहा कि बौद्ध धर्म का अंतिम उद्देश्य संपूर्ण मानव समाज से दुःख का अंत करना है। बुद्ध ने कहा था कृ “मैं केवल एक ही पदार्थ सिखाता हूँ कृ दुःख है, दुःख का कारण है, दुःख का निरोध है और दुःख के निरोध का मार्ग है।” उन्होंने बताया कि बौद्ध धर्म के अनुयायी अष्टांगिक मार्ग का अनुसरण करते हुए अज्ञानता और दुःख से मुक्ति तथा निर्वाण प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में वियतनामी और स्थानीय बौद्ध अनुयायी उपस्थित रहे।




