व्यवसायी दम्पत्ति की हत्या को आत्महत्या बनाने की तो साजिश तो नहीं?
पति-पत्नी की मौत में एक घन्टे से ज्यादा अन्तर, ब्लेड पर फिंगर प्रिन्ट के निशान

बढ़नी/सिद्धार्थनगर। नगर पंचायत बढ़नी कस्बे में प्रतिष्ठित दवा कारोबारी मदन मोहन अग्रवाल और उनकी पत्नी अंजू अग्रवाल की संदिग्ध मौत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। कमरे में खून से लथपथ दोनों की लाशें मिलने के बाद यह मामला भले ही प्रथम दृष्टया आत्महत्या का प्रतीत होता हो, लेकिन घटनास्थल से जुड़े कई अहम सवाल हैं, जो इसे एक रहस्यमय हत्या की ओर इशारा कर रहे हैं। आपको बता दें कि पुलिस को घटनास्थल से एक सीजर ब्लेड मिला था, जिससे महिला का गला रेतने की बात कही जा रही है। अब सवाल यह है कि ब्लेड पर किसके फिंगर प्रिन्ट मिले हैं? क्या ये मदन मोहन अग्रवाल के हैं या किसी और के? यदि आत्महत्या की बात सामने आती है, तो उंगलियों के निशान साफ-साफ यह बता सकते हैं कि ब्लेड का इस्तेमाल किसने किया। पुलिस ने अभी तक इस दिशा में कोई ठोस जानकारी साझा नहीं की है। वहीं आत्महत्या/हत्या के घटनास्थल से प्राप्त प्राथमिक जानकारी के अनुसार पत्नी अंजू अग्रवाल की गला रेतकर हत्या पहले की गई, जबकि पति मदन मोहन अग्रवाल की मौत बाद में हुई। यदि यह आत्महत्या है, तो दोनों की मृत्यु लगभग एक साथ या थोड़े अन्तराल पर होनी चाहिए थी। लेकिन जब एक घन्टे से ज्यादा का अन्तर स्पष्ट हो रहा है, तो यह सन्देह को जन्म देता है कि कहीं किसी तीसरे व्यक्ति की भूमिका तो नहीं? पुलिस ने मौके से एक सुसाइड नोट बरामद किया है, जिसमें आर्थिक तंगी और मानसिक तनाव की बातें लिखी गई हैं। लेकिन क्या यह नोट वाकई मदन मोहन अग्रवाल की अपनी हैंडराइटिंग में लिखा गया है? क्या हैंडराइटिंग का मिलान कराया गया? यदि यह किसी और की लिखावट में है, तो मामला पूरी तरह से हत्या की ओर मुड़ता नजर आता है। फोरेंसिक टीम से इस नोट की गहराई से जांच कराना आवश्यक है। घर के बाहर व अन्दर और मोहल्ले में लगे सीसीटीवी कैमरों में कोई संदिग्ध मूवमेंट कैद हुआ क्या? जिस आर्थिक तनाव का जिक्र सुसाइड नोट में है, क्या उसका कोई प्रमाण मौजूद है? बेटे राहुल अग्रवाल की मौजूदगी और बयान कितने सटीक हैं? क्या वो घटनाक्रम से पहले और बाद में किसी से सम्पर्क में था? आपको बता दें कि मामले की गम्भीरता को देखते हुए यह जरूरी हो गया है कि पुलिस सुसाइड की थ्योरी को अंतिम रूप देने से पहले सभी पहलुओं की निष्पक्ष और वैज्ञानिक जांच करायें। वरना यह घटना एक सोची-समझी साजिश बनकर रह जायेगी। मृतक मदन मोहन अग्रवाल और उनकी पत्नी अंजू अग्रवाल ने लाखों रुपये का जीवन बीमा कराया था। बीमा राशि को लेकर अब परिवार और जांच एजेंसियों की नजर बनी हुई है। यह भी जांच का विषय है कि कहीं बीमा राशि के लाभ के लिए यह साजिशन हत्या तो नहीं की गई।




