भारत-नेपाल सीमा पर स्थित ककरहवा बार्डर पर इमिग्रेशन कार्यालय खुलने से लोगों को मिलेगी सुविधा

ककरहवा/सिद्धार्थनगर। भारत-नेपाल सीमा पर स्थित ककरहवा बार्डर पर जल्द ही इमिग्रेशन कार्यालय खुलने की उम्मीद है। इसके लिए भारत सरकार गम्भीर प्रयास कर रही है। उत्तर प्रदेश के पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह इस विषय पर केन्द्रीय पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत से चर्चा कर चुके हैं। स्थानीय स्तर पर यह खबर मिलते ही व्यापारियों व क्षेत्रीय लोगों में खुशी का माहौल है। उनका कहना है कि इमिग्रेशन कार्यालय खुलने से न सिर्फ व्यापार को बढ़ावा मिलेगा बल्कि पर्यटन के क्षेत्र में भी नये अवसर पैदा होंगे। ककरहवा बार्डर कपिलवस्तु और लुंबिनी के लिए सबसे नजदीकी मार्ग है। यहां इमिग्रेशन की सुविधा शुरू हो जाने पर नेपाल के लुंबिनी आने वाले विदेशी पर्यटक आसानी से भगवान बुद्ध की क्रीड़ास्थली कपिलवस्तु पहुंच सकेंगे, जो यहां से महज 08 किलोमीटर की दूरी पर है। अभी सोनौली मार्ग से यह दूरी लगभग 100 किलोमीटर पड़ती है। इससे कपिलवस्तु और लुंबिनी दोनों जगह पर्यटन को सीधा फायदा होगा। वहीं स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि इमिग्रेशन सुविधा से विदेशी पर्यटकों का आवासगमन बढ़ेगा, जिससे होटल, ट्रांसपोर्ट और बाजार में रोजगार के नये अवसर मिलेंगे। (1).नेपाल सीमा से सटे ककरहवा बार्डर पर भारत सरकार इमिग्रेशन कार्यालय खोलने जा रही है। इमिग्रेशन सुविधा होने से विदेशी पर्यटकों को लुम्बिनी से कपिलवस्तु पहुंचने में काफी आसानी हो जायेगी। बालमुकुन्द जायसवाल, निवासी ककरहवा (2).ककरहवा में इमिग्रेशन कार्यालय खुलना यहां के व्यापार के लिए स्वर्णिम कार्य है। इससे व्यापारी वर्ग को सीचा लाभ होगा। पर्यटकों की संख्या बढ़ने से व्यापार को प्रोत्साहन मिलेगा। अशोक वर्मा, व्यापारी ककरहवा (3).ककरहवा बार्डर पर इमिग्रेशन कार्यालय खोलने का फैसला स्वागत योग्य है। इससे क्षेत्र का विकास होगा। पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी और इस रास्ते से विदेशी पर्यटकों के आवागमन से रोजगार का सृजन होगा। प्रहलाद गुप्ता, व्यापारी ककरहवा (4).भारत सरकार द्वारा ककरहवा में इमिग्रेशन कार्यालय खोलने का प्रयास प्रशंसनीय है। इससे विदेशी पर्यटक आसानी से लुंबिनी का दर्शन करने के बाद कपिलवस्तु पहुंच सकेंगे। नन्दलाल जायसवाल, व्यापारी ककरहवा।




