गोनहाताल में फायलेरिया रोधी अभियान की शुरूआत,घर घर जाकर दवा खिलाने का कार्य कर रहे स्वास्थ्य कर्मी

बांसी। रविवार को अमित कुमार त्रिपाठी द्वारा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गोनहाडीह के अंतर्गत ग्राम गोनहाताल में फायलेरिया रोधी अभियान की शुरूआत की गई, जिसके क्रम में घर घर जाकर दवा खिलाने का कार्य स्वास्थ्य कर्मी द्वारा किया जा रहा है।। जिलाधिकारी के निर्देश के क्रम में फाइलेरिया रोधी अभियान कार्यक्रम चलेगा बच्चों एवं किशोर किशोरियों के स्वास्थ्य, पोषण, शैक्षणिक स्तर में वृद्धि के लिए स्कूलो और आंगनबाडियों में 1-19 वर्ष की आयु के सभी बच्चों और किशोरों को कृमि से मुक्ति दिलाने हेतु जानकारी देते हुए कहा कृमि संक्रमण के लक्षण एवं दुष्प्रभाव कृमि मनुष्य की आंत में रहते हैं और जीवित रहने के लिए, मानव शरीर के जरूरी पोषक तत्व को खाते हैं। संक्रमित बच्चे के शौच में कृमि के अंडे होते हैं। खुले में शौच करने से ये अंडे मिट्टी में मिल जाते है और विकसित होते हैं। गंभीर कृमि संक्रमण से कई लक्षण उत्पन्न हो सकते हैं जैसे दस्त, पेट में दर्द, कमजोरी, उलटी और भूख ना लगना बच्चे में कीड़े की मात्रा जितनी अधिक होगी, संक्रमित व्यक्ति के लक्षण उतने ही अधिक होंगे कृमि नियंत्रण से बचाव, इलाज और फायदे नाखून साफ और छोटे रखें, हमेशा साफ पानी पीएं खाने को ढक कर रखें साफ पानी से फल व अपने हाथ साबुन से धोये, विशेषकर खाने से पहले और शौच जाने के बाद, आस पास सफाई रखें जूते पहने, खुले में शौच ना करें, हमेशा शौचालय का प्रयोग करें ।उपचार -कृमि संक्रमण का इलाज सुरक्षित और लाभकारी डीवॉर्मिंग टैबलेट (एल्बेंडाजोल) का उपयोग करके किया जासकता है ।




