जन्म प्रमाण पत्र के नाम पर इटवा तहसील में खुली मनमानी, जनता बेहाल

इटवा/सिद्धार्थनगर। प्रदेश सरकार द्वारा जारी स्पष्ट दिशा-निर्देशों के बावजूद इटवा तहसील में जन्म प्रमाण पत्र को लेकर गम्भीर अनियमिततायें सामने आ रही हैं। तहसील में कार्यरत दो एसडीएम एक प्रशासनिक और एक न्यायिक हैं। वहीं जन्म प्रमाण पत्र जारी करने को लेकर अलग-अलग नियमों का पालन कर रहे हैं, जिससे आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बीडीओ, एडीओ पंचायत और सचिव की रिपोर्टें भी अनदेखी हो रही है। सूत्रों के अनुसार ग्राम स्तर पर पंचायत सचिव, बीडीओ और एडीओ पंचायत द्वारा जाँचकर भेजी गई रिपोर्टों के बावजूद भी कई जन्म प्रमाण पत्र के आवेदन बिना ठोस कारणों के निरस्त कर दिये जा रहे हैं। जनता को अब तक यह भी नहीं बताया गया है कि किस आधार पर आवेदन खारिज हो रहे हैं। आपको बता दें कि पहले प्रक्रिया आसान थी और अब जटिल बना दी गई। पहले के वर्षों में सिर्फ आधार कार्ड, शपथ पत्र और दो गवाहों के आधार पर जन्म प्रमाण पत्र आसानी से जारी हो जाता था। लेकिन अब दोनों एसडीएम ने अपनी-अपनी प्रक्रिया बना रखी है, जिससे फाइलें एक टेबल से दूसरी टेबल तक भटक रही हैं। सबसे गम्भीर बात यह है कि तहसील में तैनात प्राइवेट कर्मियों पर न्यायिक फाइलों में छेड़छाड़ और कथित रूप से धन लेकर प्रमाण पत्र जारी करने के आरोप लग रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बिना ष्चाय पानीष् के न तो फाइल आगे बढ़ती है, न प्रमाण पत्र बनता है। शिकायतों के अनुसार कई बार बिना वजह आवेदन निरस्त कर दिए जाते हैं। जबकि स्थानीय निवासियों ने बताया कि ष्जन्म प्रमाण पत्र के लिए हम कई बार तहसील के चक्कर काट चुके हैं। कोई साफ गाइडलाइन नहीं है। कर्मचारी कहते हैं पैसा दो वरना फाइल रिजेक्ट हो जायेगी।ष् उन्होंने कहा कि जन्म प्रमाण पत्र को लेकर एक समान नीति लागू की जाये और गाइडलाइन को सार्वजनिक किया जाये। भ्रष्टाचार में लिप्त प्राइवेट कर्मियों पर सख्त कार्रवाई हो। प्रशासनिक और न्यायिक अधिकारियों के बीच तालमेल स्थापित हो।




