अहिल्याबाई होल्कर के शासनकाल को सुशासन की मिशाल माना जाता है-पूर्व मंत्री डॉ. सतीश द्विवेदी

इटवा/सिद्धार्थनगर। कस्बे के एक मैरेज हॉल में भाजपा की ओर से अहिल्याबाई होल्कर स्मृति अभियान के तहत सोमवार को विधानसभा पंचायत प्रतिनिधि सम्मेलन का आयोजन हुआ। इसमें क्षेत्रीय मंत्री राजेश पाल ने कहा कि लोकमाता अहिल्याबाई का जीवन धर्म, कर्म और सुशासन का प्रतीक है। उनके प्रशासनिक कौशल और धार्मिक समर्पण ने उन्हें युगों तक अमर कर दिया। उन्होंने कहा कि आज अहिल्याबाई होल्कर के नाम पर सात जनपद में श्रमजीवी महिला हॉस्टल संचालित हैं। मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के तहत 22.12 लाख, महिला पेंशन योजना से 30.98 लाख और बाल सेवा योजना से 53.60 लाख लाभार्थी लाभान्वित हो चुके हैं। प्रधानमंत्री स्वनिधि और मातृ वंदना योजनाओं के जरिए 60 लाख से अधिक महिलाएं सशक्त हुई हैं। पूर्व मंत्री डॉ. सतीश द्विवेदी ने कहा कि अहिल्याबाई होल्कर ने बाबा विश्वनाथ मंदिर को वर्तमान स्वरूप दिया और उनके शासनकाल को सुशासन की मिशाल माना जाता है। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर में दो भारतीय बेटियों के शौर्य का जिक्र करते हुए नारी शक्ति को सलाम किया। इस दौरान बिस्कोहर चेयरमैन अजय गुप्त, इटवा चेयरमैन विकास जायसवाल, कृष्णा मिश्र, प्रदीप कसौधन, बलराम मिश्र, हरिशंकर सिंह, राजेंद्र दुबे, दीप नारायण त्रिपाठी, राजेश पांडेय आदि मौजूद रहे। शौर्य, साधना, सेवा, समर्पण की प्रतीक हैं अहिल्याबाई नौगढ़ ब्लॉक सभागार में पंचायत प्रतिनिधि एवं कार्यकर्ता सम्मेलन ककरहवा। अहिल्या बाई होलकर जन्म त्रिशताब्दी स्मृति अभियान के तहत सोमवार को नौगढ़ ब्लॉक सभागार में पंचायत प्रतिनिधि एवं कार्यकर्ता सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें संतकबीरनगर के पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष सेतभान राय ने कहा कि अहिल्याबाई होलकर का जीवन प्रेरणादायक है। उनका जीवन शौर्य, साधना, सेवा, समर्पण और सादगी का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि अहिल्या बाई होलकर नारी सशक्तिकरण की प्रेरणा स्रोत, एक अद्वितीय व्यक्तित्व की महिला थी। उन्होंने अपने शासन काल में मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र को एक नई दिशा दी। उनकी न्यायप्रियता, प्रशासनिक क्षमता और धार्मिक सहिष्णुता ने उन्हें एक आदर्श शासक बनाया। विधायक श्यामधनी राही ने कहा कि सनातन संस्कृति में अगाध आस्था रखने वाली अहिल्या बाई ने विपरीत परिस्थितियों में भी भारत के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को संजोए रखा। तत्कालीन मुगलों के शासनकाल होने के बावजूद भी उन्होंने सोमनाथ मंदिर, काशीसहिष्णुता ने उन्हें एक आदर्श शासक बनाया। विधायक श्यामधनी राही ने कहा कि सनातन संस्कृति में अगाध आस्था रखने वाली अहिल्या बाई ने विपरीत परिस्थितियों में भी भारत के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को संजोए रखा। तत्कालीन मुगलों के शासनकाल होने के बावजूद भी उन्होंने सोमनाथ मंदिर, काशी विश्वनाथ मंदिर सहित सैकड़ों मंदिरों का जीर्णाेद्धार कराया। वह एक न्यायप्रिय महारानी थी। अध्यक्षता जिलाध्यक्ष कन्हैया पासवान ने किया। इस दौरान तेजू विश्वकर्मा, सत्य प्रकाश राही, नितेश पांडेय, दीपक मौर्य, विपिन सिंह, फतेहबहादुर सिंह, सच्चिदानंद चौबे, अरुणिमा मिश्रा, राजेश मिश्र, रेनू मिश्रा आदि मौजूद रहीं।



