कृष्ण का जन्म होते ही जयकारे से गूंज उठा कथा पंडाल

छावनी। छावनी क्षेत्र के पूरे वेद गांव चल रही नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा में पाचवें दिन बुधवार को कथा व्यास ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की मार्मिक कथा का वर्णन किया। कथा व्यास कहते हैं कि धरती वासी कंस के अत्याचार से त्राहि त्राहि कर रहे थे।मानवता अंतिम सांसे ले रही थी,धर्म का मार्ग बंद हो चुका था। ऐसे में धर्म की रक्षा के लिए स्वयं भगवान श्री कृष्ण को जन्म लेना पड़ा। भगवान श्री कृष्ण का जन्म होते ही कथा पंडाल जय जय कर से गूंज उठा।उक्त दृश्य और वातावरण श्रीमद भागवत कथा के दौरान जीवंत हो उठा। कथा व्यास कुलपरोहित पं० प्रेम नरायन पाण्डेय महराज डी ने श्री कृष्ण जन्म कथा प्रसंग की कथा का वर्णन कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कथा का विस्तार करते हुए कथा व्यास ने कहा कि जब जब धर्म की हानि होती है, तब तब स्वयं भगवान श्री नारायण धरती पर अवतार लेकर दुष्टों का विनाश कर के धर्म की स्थापना करते हैं। कथा व्यास ने कहा कि किसी भी परिस्थिति में धर्म का संग नही छोड़ना चाहिए, प्रभु अपने भक्त की परीक्षा तो लेते हैं,लेकिन कठिन परीक्षा में भी अपने भक्त को हारने नही देते। इसलिए कभी भी धर्म विमुख नही होना चाहिए। कृष्ण जन्मोत्सव के दौरान झांकी का आयोजन हुआ व सारा पण्डाल भक्तिमय भजनों से गूंज उठा। कृष्ण का जन्म होते ही जयकारे से पूरा पांडाल गुंजायमान हो उठा।उक्त दृश्य और वातावरण श्रीमद भागवत कथा के दौरान जीवंत हो उठा। श्री महराज ने कथा को विस्तार देते कहा इस कलिकाल में लोग माया के वशीभूत होकर अहंकारी हो जाते है। अहंकार के मद में चूर किसी कार्य को होने में अपना श्रेय लेते है। कहा मनुष्य को सफलता मिलने पर सबकुछ होने के बाद भी लोगो को अभिमान नही करना चाहिए। सफलता का श्रेय भगवान को ही देना चाहिए। अजामिल की कथा विस्तार से सुनाय। श्री महराज ने स्वर्ग और नरक की परिभाषा बताते हुए कहा कि अनजाने में किए गए पाप का प्रायश्चित हो जाता है, पर लोगो द्वारा जान बूझकर किए गए पाप का दंड अवश्य मिलता है। परमात्मा का नाम जपने से ही मुक्ति मिलती है। भगवान का नाम लेने से पाप कम हो जाता है। कहा कि जहां सम्मान मिले वहाँ जाना चाहिए। आज मनुष्य ईमानदारी और पवित्रता का दिखावा ज्यादा करता है। पवित्र वो है जिसका एकांत पवित्र होता है। योगी को भी एकांत चाहिए, भोगी को भी वासना के लिए एकांत चाहिए। कथा सागर में डुबकी लगाने से लोगो का जीवन धन्य हो जाता है। मनुष्य सुख के पीछे जीवन भर भागता रहता है। पर जीवन में सुख की तलाश कभी पूरी नहीं होती है इसलिए ईश्वर ही सत्य है लोगो को ईश्वर पर भरोषा करना चाहिए इस दौरान आयोजक यजमान रघुवीर दूबे व पत्नी प्रभावती दूबे,राधेश्याम दूबे,राज मंगल, उमापति, श्यामनरायन, रोहित, कमल नयन, राजवीर,निर्मल सहित अन्य के अलावा आसपास के अन्य गावो केश्रद्धालु श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मे शामिल रहे ।




