बिना आधार हाहाकार कैसे हो विद्यालयों में प्रवेश

सिद्धार्थनगर। गत 1 अप्रैल से जनपद में स्कूल चलो अभियान रैली गतिमान है। बच्चे स्कूलों में प्रवेश लेना चाहते हैं किंतु बिना आधार के उनका प्रवेश कैसे हो, यह टेढ़ी खीर है। बिना आधार के बच्चे दर दर भटकने के लिए विवश हैं। गौरतलब है कि बिना जन्म प्रमाण पत्र के किसी भी बच्चे अथवा बच्ची का आधार बनेगा ही नहीं। तहलीलों से जन्म प्रमाण पत्रों का बनना आसान नहीं है। ईंट भट्ठों के मजदूर हों या दिहाड़ी मजदूर अथवा परदेश में जीविका के लिए दर बदर भटकते हुए मजदूर परदेसी हों, उनके घरों में तहसीलों पर दौड़ने वाला कोई आदमी नहीं है। ग्रामीण परिवेश की महिलाएं आखिर तहसीलों की पद यात्रा कैसे करें। जन्म प्रमाण पत्र बनवाने में एक माह से कम का समय नहीं लगता है। सवाल यह है कि तब तक क्या बच्चों को स्कूलों की छत नसीब नहीं होगी। सभी शिक्षकों की मांग है कि तहसीलों में जन्म प्रमाण पत्रों को बनवाने की प्रक्रिया को आसान किया जाए ताकि शासन की मंशा के अनुकूल विद्यार्थियों को विद्यालयों में प्रवेश दिया जाए। बार बार स्कूलों के ग्रुपों में प्रधानाध्यापकों अथवा प्रभारी प्रधानाध्यापकों पर आदरणीय खंड शिक्षा अधिकारी महानुभावों द्वारा वेतन रोकने की कार्रवाई का हवाला न दिया जाए। उस प्रकरण के लिए शिक्षकों को दोषी न बनाया जाए जिसके लिए अन्य जिम्मेदार हैं। ध्यातव्य है कि अपार आई बनने का मामला हो या आधार की पेंडेंसी समाप्त करने का मामला हो, इसके लिए शिक्षकों को ही उत्तरदाई ठहराया जाता है। हकीकत यह है शिक्षा विभाग के जिम्मेदारों द्वारा शिक्षकों को प्रत्येक प्रकरण के लिए वेतन रोकने की कार्रवाई प्रस्तावित करने की बात कहने के कारण ही आज कोई भी प्रधानाध्यापक अथवा प्रधानाध्यापक किसी भी दशा में बिना आधार के किसी बच्चे अथवा बच्ची का नाम लिखने को तैयार नहीं है।



