गोरखपुर        महराजगंज        देवरिया        कुशीनगर        बस्ती        सिद्धार्थनगर        संतकबीरनगर       
उत्तर प्रदेशसिद्धार्थनगर

शबे बरात नरक से निजात पाने की रात है: मौलाना मो. उसमान अ़लीमी

इटवा/सिद्धार्थनगर। शबे बरात का पर्व हिजरी कैलेंडर के शाबान महीने की 14वीं तारीख को सूर्यास्त के बाद मनाया जाता है। शब का अर्थ है रात्रि, जबकि बरात का मतलब है बरी होना अर्थात मोक्ष प्राप्त करना या पापों से छुटकारा पाने की रात। इस रात में अल्लाह की कृपा या रह़मत से बेशुमार मोमिन नरक या जहन्नम से निजात पाते हैं। इसलिए इसको “शबे बरात” कहा जाता है। यह पर्व गुरूवार 13 फरवरी 2025 को मनाया जाएगा। उक्त बातें कस्बा स्थित बिस्कोहर रोड सुन्नी जामा मस्जिद के इमाम मौलाना उसमान अ़लीमी ने बुधवार को एक भेंटवार्ता में कही है। उन्होंने शबेबरात पर्व की विशेषता बताते हुए आगे कहा कि अल्लाह पाक ने उम्मते मोह़म्मदिया को कई नूरानी या आध्यात्मिक रातें दी हैं। जिन में इबादत व रियाज़त करके अल्लाह को राजी़ किया जाता है। उन नूरानी रातों में 15वीं शाबान की रात का विशेष महत्व है। इस रात में अल्लाह अपनी खास रहमतों को नाज़िल फरमाता है। फरिश्तों की जमाअ़त को दुनिया में भेजता है। पैगम्बरे इस्लाम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया- जब शाबान की 15वीं रात यानी शबे बरात आए तो उसमें इ़बादत करो। दिन में रोजा़ या उपवास रखो। बेशक अल्लाह उस रात सूरज डूबते ही आसमानी दुनिया की तरफ से नुज़ूले रह़मत फरमाता है और इरशाद फरमाता है कि है कोई बख्शिश मांगने वाला कि मैं उसे बख्श दूँ, है कोई रोज़ी मांगने वाला कि मैं उसे रोजी़ दूं, है कोई मुसीबत में फ़ंसा हुआ कि मैं उसे छुटकारा दूं, है कोई ऐसा यहां तक कि फजर का वक्त शुरू हो जाता है। दूसरी हदीस़ शरीफ़ में है बेशक अल्लाह शाबान की 15वीं रात आसमानी दुनिया पर नजू़ल फरमाता है और बनी कल्ब की बकरियों के बालों की तादाद से ज़्यादा गुनहगारों को माफी देता है। इसलिए इस शुभ रात में पवित्र कुरआ़न की तिलावत करनी चाहिए। नवाफ़िल पढ़ना चाहिए और अपने पापों से तौबा करके अल्लाह से सच्चे दिल से माफी मांगनी चाहिए। इस रात सांसारिक मोह माया, कुकृत्यों से दूर रहना चाहिए।

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!