टेढ़ी नदी के तट पर स्थित झूला घाट मंदिर का नहीं हुआ सौंदर्यीकरण
प्रतिवर्ष यहां आयोजित होता है बड़े स्तर पर मेला
दैनिक बुद्ध का सन्देश
पयागपुर / बहराइच | बहराइच जिले के पयागपुर तहसील के विशेश्वरगंज ब्लॉक अंतर्गत टेढ़ी नदी के तट पर स्थित झूला घाट का आश्रम झूले बाबा के नाम से प्रसिद्ध है प्रतिवर्ष यहां कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर भव्य मेला का आयोजन होता है जिसमें गोंडा बहराइच श्रावस्ती तक के स्त्री पुरुष बूढ़े नौजवान बच्चे सब मेला करने के लिए आते हैं और झूला घाट पर जो मंदिर है उसमें भगवान राम सीता और लक्ष्मण की मूर्ति स्थापित है तथा स्थानीय लोगों के प्रयास से यहां पर झूला घाट मंदिर का निर्माण किया गया | स्थानीय लोगों के मुताबिक टेढ़ी नदी के तट पर स्थित झूला घाट पर सैकड़ो वर्षों से मेले का आयोजन होता है और अगर धार्मिक दृष्टि से देखे तो यहां पर झूला बाबा की समाधि बनी हुई है उस समाधि पर उस समय बहुत बड़ा चमत्कार हुआ जब यहां के पुजारी मोहन दास ने भोर में उठकर समाधि का पूजा करने के लिए जब गए तो वहां उन्हें₹5000 समाधि पर रखे मिले जिसे लाकर जब इन्होंने अपने साथियों से गिनवाया तो पूरे ₹5000 मिले लेकिन यह रुपए कहां से आए और किसने रखा यह आज तक रहस्य मय बना हुआ है तथा लोग इसे बाबा का चमत्कार मानते हैं ; वहीं इस मंदिर के आसपास तीन समाधियां और बनी हुई हैं जो विभिन्न महंतों की है जिन्होंने झुलाघाट मंदिर का सेवा करते-करते अपना जीवन पर्यंत त्याग तपस्या और धर्म में लगा दिया | आपको और बताते चले कि टेढ़ी नदी झूलाघाट मंदिर से 20 मीटर नीचे बहती है और इस नदी के तट पर हनुमान की मंदिर और शंकर की मंदिर स्थापित है जो जन सहयोग से मिलकर बनाई गई है तथा जो पक्के घाट का निर्माण कराया गया है वह आपसी सहयोग से हुआ है इसमें किसी प्रकार की कोई सरकारी सहायता नहीं मिली है | धर्मशाला का निर्माण महंत के द्वारा किया गया है | मदन दास वन घुसरी विशेश्वरगंज ने बताया कि घाट पर बाबा की समाधि कच्ची मिट्टी की थी और कुछ भक्त यहां पर आए तथा भागवत होते समय पानी आ गया तब भी लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया | मोहन दास बताते हैं कि कच्ची मिट्टी की बनी समाधि के ऊपर सुबह 4:00 बजे 5000 रूपये मिला और उसी रुपए से मंदिर का निर्माण हुआ यह पैसे कहां से आए इसका पता आज तक नहीं लगा लेकिन सभी लोग उसे बाबा का चमत्कार मानते हैं | वहीं ननकऊ दास बताते हैं कि यह दोनों आंख के अंधे हो गए थे लगभग एक महीना बीत गया था एक दिन जब बाबा के स्थान पर भंडारा चल रहा था तो प्रसाद लेने के बाद जब मैंने ग्रहण किया तो चमत्कार हो गया और मेरी आंखों की दृष्टि वापस आ गई | झूलाघाट मंदिर और इसके आसपास बने परिसर में धर्मशाला लोगों के ठहरने और कार्यक्रम करने के लिए बनाया गया है लेकिन स्थानीय प्रशासन की उपेक्षा का शिकार झूलाघाट मंदिर आज तक बना हुआ है कभी भी सरकार ने इसके उत्थान के लिए कोई प्रयास नहीं किया | दूर-दूर से अपनी मनोकामना की पूर्ति करने के लिए श्रद्धालु आते हैं और जब उनकी मनोकामना पूरी होती है तो यहां पर आकर बड़े श्रद्धा मन से भंडारे का आयोजन करते हैं और यहां पर रह रहे साधु संतों की बड़ी ही धर्म परायणता के साथ सेवा भाव भी करते हैं | यह मंदिर परिसर लगभग 16 बीघा में फैला हुआ है और यहां पर एक कूप भी बनाया गया है जिसको लेकर यह जानकारी मिली है कि विशेश्वरगंज ब्लाक अंतर्गत गंगवल बाजार के रहने वाले बिहारी लाल की जब मिन्नतें पूरी हुई तो उन्होंने पूर्वी सिरे पर कूप का निर्माण कराया जो आज भी बना हुआ है लेकिन देख रेख के अभाव में काफी जीर्ण शीर्ण होता जा रहा है | यहां पर श्रद्धालुओं के बैठने के लिए कोई भी बेंच आदि की व्यवस्था नहीं है तथा प्रशासन की घोर अपेक्षा के होने के नाते झूला घाट मंदिर और परिसर अभी भी अपने पुराने अवस्था में ही नजर आ रहा है | यहां पर रहने वाले पुजारी और स्थानीय लोगों की प्रशासन से मांग है कि झुलाघाट मंदिर और उसके आसपास स्थित परिसर तथा टेढ़ी नदी के तट पर बने घाट का भली भांति सौंदर्यीकरण कराया जाए जिससे यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भारी इजाफा हो क्योंकि जिले का सबसे बड़ा मेला इसी मंदिर के परिसर में हर साल आयोजित होता रहता है |





