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ग्रामीणों के आंदोलन पर गैंड़ास बुजुर्ग थानाध्यक्ष लाइन हाजिर, उतरौला कोतवाल पर कार्रवाई का इंतजार

दैनिक बुद्ध का संदेश
उतरौला, बलरामपुर।27 मई को कोतवाली उतरौला क्षेत्र के अहिरौला निवासी धनराज मौर्य व अन्य के साथ गैंड़ास बुजुर्ग थाना क्षेत्र के पिपरा राम में हुई मारपीट के बाद धनराज की मौत से उपजे तनाव व पुलिस के खिलाफ पनपे आक्रोश को एसपी ने कम करने की पहल की है। लगातार विवादों में घिरे गैंडास थानाध्यक्ष राजीव मिश्र को पुलिस लाइन से संबद्ध कर दिया गया है। राणा प्रताप सिंह को नया थाना प्रभारी बनाया गया है। शनिवार को गांव में पहुंचे डीएम नितिन जैन व एसपी विकास कुमार से ग्रामीणों ने दोनों थाना प्रभारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग करते हुए नारेबाजी की थी। गैंड़ास बुजुर्ग के थानाध्यक्ष पर आरोप था कि उन्होंने राजू मौर्य के बयान को दरकिनार कर अपनी मर्जी से तहरीर तैयार करवाई। आरोपियों पर रहमदिली दिखाते हुए उनके विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई करने के बजाय सीधे जेल भेज दिया था। यही नही गैंड़ास की पुलिस चौबीसों घंटे आरोपियों के घरों की सुरक्षा करती रही। उतरौला के प्रभारी निरीक्षक अवधेश राज सिंह पर ग्रामीणों का आरोप है कि घटना करने वाले अभियुक्त इससे पहले भी कई जगहों पर मारपीट व दबंगई करते रहे लेकिन हर बार उतरौला पुलिस सुलह करवाती रही जिससे दबंगों का मनोबल बढ़ता गया। 26 मई को आरोपी अहिरौला गांव में गये थे जहां ग्रामीणों से कहासुनी हुई लेकिन पुलिस ने एहतियात नही बरती जिसके चलते 27 मई को बड़ा संघर्ष हुआ। इस संघर्ष में धनराज मौर्य के साथ पांच अन्य लोग जो बीच बचाव कराने गये थे। उन्हें भी बुरी तरह मारा गया। इस घटना में धर्मराज की चाची मीना देवी के गंभीर चोटें आईं और उनके हाथ की उंगली को भी एक आरोपी ने दातों से काट कर अलग कर दिया था। आरोपियों से पहले भी लड़ाई झगड़ा होने के बाद उतरौला पुलिस ने कोई कार्रवाई करने के बजाय सुलह समझौता कराती रही थी। पुलिस अधीक्षक ने गैंड़ास बुजुर्ग के थानाध्यक्ष के विरुद्ध कार्रवाई की है लेकिन ग्रामीण उतरौला कोतवाल के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए हैं।

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