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उत्तर प्रदेशबस्ती

छावनी पुलिस की लापरवाही पर उठे सवाल, पीड़ित परिवार न्याय के लिए भटकने को मजबूर

दैनिक बुद्ध का संदेश
बस्ती। बस्ती जिले के छावनी थाना क्षेत्र से पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। सुहगिया शंकरपुर निवासी शिवपूजन पुत्र रामनाथ ने पुलिस अधीक्षक को पत्र देकर आरोप लगाया है कि उनकी आबादी की जमीन पर जबरन कब्जे की कोशिश, परिवार के साथ मारपीट और थाने की उदासीनता के बावजूद उन्हें न्याय नहीं मिल रहा है। पीड़ित का आरोप है कि पुलिस न केवल मामले में लापरवाही बरत रही है, बल्कि उल्टा उन पर दबाव बनाने का काम कर रही है। बताते चले कि 4 अप्रैल को गांव के ही रुश्मा पत्नी हरिविजय मौर्या और राम प्रसाद पुत्र रामदास मौर्या पीड़िता की आबादी की भूमि पर जबरिया कब्जा करने की कोशिश करने लगे। जब पीड़िता संजू ने इसका विरोध किया, तो आरोपियों ने उसके साथ मारपीट की। यह घटना पूरे विवाद की शुरुआत मानी जा रही है, जिसके बाद पीड़ित परिवार लगातार हमलों और दबाव का सामना कर रहा है। शिवपूजन के अनुसार, घटना की सूचना लेकर जब वे छावनी थाने पहुंचे, तो पुलिस ने उनकी शिकायत सुनने के बजाय उन्हें टाल दिया। पीड़ित का कहना है कि उसी दिन शाम को आरोपी धारदार हथियार लेकर उनके घर पहुंच गए और उनके 11 वर्षीय बेटे अभिषेक के साथ भी मारपीट की। इसके बावजूद पुलिस की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। अगले दिन 5 अप्रैल को आरोपियों ने उनकी बाउंड्रीवाल गिरा दी, जिसका वीडियो साक्ष्य भी मौजूद है। लेकिन गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज करने के बजाय पुलिस ने अपने स्तर से हल्की धाराओं में मामला दर्ज कर दिया। इतना ही नहीं, पीड़ित के अनुसार पुलिस ने ऐसे व्यक्ति को नामजद कर दिया जो घटनास्थल पर मौजूद ही नहीं था, जिससे पूरे मामले को कमजोर करने की कोशिश साफ नजर आती है। शिवपूजन का आरोप है कि जब उन्होंने दोबारा न्याय की गुहार लगाई, तो छावनी पुलिस ने कार्रवाई करने के बजाय उन पर पांच गवाह पेश करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। सवाल यह उठता है कि जब पीड़ित के पास घटना का वीडियो साक्ष्य मौजूद है, तो फिर गवाहों की अनिवार्यता क्यों थोपी जा रही है? यह पुलिस की निष्पक्षता पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। इस पूरे मामले में पुलिस की भूमिका बेहद संदिग्ध नजर आ रही है। एक ओर जहां कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी पुलिस पर होती है, वहीं इस तरह के मामलों में पीड़ित को ही परेशान करना पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि पीड़ित के आरोप सही हैं, तो यह न केवल लापरवाही बल्कि कर्तव्य की अनदेखी का भी मामला बनता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि छावनी थाना क्षेत्र में इस तरह की शिकायतें पहले भी सामने आ चुकी हैं, जहां पुलिस समय पर कार्रवाई करने में असफल रही है। इससे आम जनता का पुलिस पर से भरोसा उठता जा रहा है। अब देखना यह होगा कि पुलिस अधीक्षक इस मामले में क्या संज्ञान लेते हैं और क्या पीड़ित परिवार को न्याय मिल पाता है या नहीं। फिलहाल, शिवपूजन और उनका परिवार न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है, जबकि कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी निभाने वाली पुलिस तमाशबीन बनी हुई है।

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