लोटन में प्रसव के दौरान नवजात की मौत, आशा बहू समेत चार पर मुकदमा दर्ज

दैनिक बुद्ध का संदेश
सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थनगर जिले के लोटन बाजार स्थित एक निजी अस्पताल में प्रसव के दौरान नवजात की मौत का मामला सामने आया है। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने आशा बहू, डॉक्टर, जीएनएम और अस्पताल प्रबंधक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। घटना सीएचसी लोटन के समीप संचालित सदभावना हॉस्पिटल एंड फ्रैक्चर क्लीनिक की बताई जा रही है। मृतक नवजात के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। पीड़ित हरिशंकर मौर्य के अनुसार मंगलवार सुबह गर्भवती रूबी को प्रसव के लिए सीएचसी लोटन ले जाया गया था। जांच और अल्ट्रासाउंड के बाद चिकित्सकों ने उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया। आरोप है कि रेफर होने के बाद गांव की आशा बहू पुष्पा ने जिला अस्पताल ले जाने के बजाय उन्हें सीधे सदभावना हॉस्पिटल पहुंचा दिया। परिजनों का कहना है कि अस्पताल में डॉक्टर नज़रुल हसन और जीएनएम पूजा जायसवाल द्वारा दोबारा अल्ट्रासाउंड कराया गया। आरोप है कि रात करीब आठ बजे प्रसव के दौरान महिला के पेट पर दबाव डालकर जबरन डिलीवरी कराने का प्रयास किया गया, जिससे गर्भ में पल रहे नवजात की मौत हो गई। परिवार का आरोप है कि बच्चे की मौत होने के बाद भी अस्पताल प्रशासन ने करीब एक घंटे तक इसकी जानकारी नहीं दी और मामले को छिपाने का प्रयास किया। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि प्रसव के दौरान प्रसूता का एक छोटा ऑपरेशन किया गया था, लेकिन बच्चे की मौत के बाद जीएनएम बिना टांका लगाए ही अस्पताल छोड़कर चली गईं। घटना की जानकारी होने पर अस्पताल परिसर में हंगामा शुरू हो गया। सूचना मिलने पर थानाध्यक्ष हरिओम कुशवाहा पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और मामले की जांच शुरू कराई। बताया जा रहा है कि पुलिस के पहुंचने से पहले अस्पताल का अधिकांश स्टाफ वहां से जा चुका था। पुलिस ने तहरीर के आधार पर आशा बहू पुष्पा, डॉक्टर नज़रुल हसन, जीएनएम पूजा जायसवाल और अस्पताल प्रबंधक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। वहीं परिजनों का आरोप है कि अस्पताल से पंजीकरण संबंधी दस्तावेज मांगने पर उन्हें बताया गया कि सभी कागजात कार्यालय में जमा हैं और एक सप्ताह के भीतर पंजीकरण हो जाएगा। इस घटना के बाद क्षेत्र में निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रसव के मामलों में मरीजों को निजी अस्पतालों तक पहुंचाने के बदले आशा बहुओं को कमीशन दिए जाने की चर्चाएं आम हैं, जिसके कारण कई गरीब परिवार सरकारी अस्पतालों के बजाय निजी संस्थानों में पहुंच जाते हैं। सीएचसी लोटन के अधीक्षक डॉ. अमित चौधरी ने बताया कि मामले की जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम भेजी जा रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा। उल्लेखनीय है कि पिछले 15 दिनों में जिले में नवजात की मौत का यह दूसरा मामला है, जिससे स्वास्थ्य विभाग की निगरानी और निजी अस्पतालों के संचालन पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं।




