लोकसभा में बौद्ध अध्ययन को मुख्यधारा में लाने का मुद्दा उठाया गया

दैनिक बुद्ध का संदेश
नई दिल्ली। सोमवार को लोकसभा में सांसद जगदम्बिका पाल ने देश के विश्वविद्यालयों में बौद्ध अध्ययन को मुख्यधारा में शामिल करने से संबंधित एक महत्वपूर्ण प्रश्न उठाया। उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या राष्ट्रीय शिक्षा नीति २०२० के अंतर्गत भारतीय ज्ञान परंपरा के तहत बौद्ध अध्ययन को स्नातक, स्नातकोत्तर और शोध स्तर पर व्यवस्थित रूप से विकसित करने की योजना है। सांसद ने यह भी जानना चाहा किरू क्या बौद्ध अध्ययन के लिए एक मानकीकृत पाठ्यक्रम तैयार किया जा रहा है, जिसमें पाली भाषा, बौद्ध दर्शन, तिब्बती अध्ययन, पुरातत्व और विरासत संरक्षण जैसे विषय शामिल हों। क्या सिद्धार्थनगरदृकपिलवस्तुदृश्रावस्तीदृकुशीनगर क्षेत्र तथा धर्मशाला में उत्कृष्टता केंद्र या विशेष अध्यासन स्थापित करने की योजना है। क्या बौद्ध देशों (श्रीलंका, जापान, थाईलैंड, भूटान, म्यांमार) के साथ अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ाने के लिए ठोस पहल की जा रही है। इस प्रश्न के माध्यम से जगदम्बिका पाल ने भारत की बौद्ध विरासत को शिक्षा, संस्कृति और वैश्विक कूटनीति से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने विशेष रूप से उत्तर प्रदेश के बौद्ध सर्किट क्षेत्र को अकादमिक और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विकसित करने की दिशा में ठोस कदम उठाने की मांग की। सरकार ने अपने उत्तर में बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति २०२० के तहत भारतीय ज्ञान परंपरा को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न विश्वविद्यालयों में बौद्ध अध्ययन के पाठ्यक्रम संचालित हैं तथा डिजिटल मंच ‘स्वयं’ पर भी संबंधित पाठ्यक्रम उपलब्ध कराए जा रहे हैं।




