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उत्तर प्रदेशसिद्धार्थनगर

दैनिक बुद्ध का संदेश
नई दिल्ली। वरिष्ठ सांसद जगदंबिका पाल ने आज लोकसभा के शून्यकाल के दौरान देशभर की आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं से जुड़े मानदेय, सेवा-शर्तों और सामाजिक सुरक्षा के महत्वपूर्ण मुद्दे को उठाते हुए सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित किया। श्री पाल ने कहा कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं देश की पोषण व्यवस्था, प्रारंभिक बाल शिक्षा, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य तथा विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की आधारशिला हैं। उन्होंने बताया कि पोषण अभियान, टीकाकरण जागरूकता, गर्भवती एवं धात्री महिलाओं की देखभाल तथा 3 से 6 वर्ष के बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा प्रदान करने में इनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने इस वर्ग के व्यापक योगदान को रेखांकित करते हुए बताया कि देश में लगभग 12.93 लाख आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं 11.64 लाख सहायिकाएं कार्यरत हैं। उत्तर प्रदेश में ही लगभग 1.54 लाख कार्यकर्ता और 1.32 लाख सहायिकाएं सेवाएं दे रही हैं। इसके बावजूद उन्हें मात्र लगभग ₹6,000 मासिक मानदेय दिया जा रहा है, जो वर्तमान महंगाई और जीवन-यापन की लागत के अनुरूप अत्यंत अपर्याप्त है। श्री पाल ने सामाजिक सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मातृत्व लाभ (संशोधन) अधिनियम, 2017 के अंतर्गत 26 सप्ताह के मातृत्व अवकाश का प्रावधान होने के बावजूद आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को व्यवहारिक रूप से इसका लाभ नहीं मिल पाता। साथ ही, प्राथमिक विद्यालयों में ग्रीष्मकालीन अवकाश होने के बावजूद आंगनवाड़ी केंद्र संचालित रहते हैं, जिससे कार्यकर्ताओं को आवश्यक अवकाश नहीं मिल पाता। माननीय उच्चतम न्यायालय तथा विभिन्न उच्च न्यायालयों के अवलोकनों का उल्लेख करते हुए श्री पाल ने कहा कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को सरकार की विस्तारित इकाई के रूप में देखा जा रहा है, जिससे उनकी सेवा-शर्तों और अधिकारों पर पुनर्विचार की आवश्यकता और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। इन परिस्थितियों को देखते हुए जगदंबिका पाल ने सरकार से आग्रह किया कि, आंगनवाड़ी सेवाओं के नियमितीकरण पर गंभीरता से विचार किया जाए, मानदेय में सम्मानजनक एवं यथोचित वृद्धि सुनिश्चित की जाए; तथा मातृत्व अवकाश एवं ग्रीष्मकालीन अवकाश सहित आवश्यक सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं प्रदान की जाएं। श्री पाल ने सरकार से अपेक्षा की कि वह आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं के योगदान को सम्मान देते हुए उनकी लंबे समय से चली आ रही समस्याओं का संवेदनशील एवं नीतिगत समाधान सुनिश्चित करेगी।

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