दो बच्चों ने 27वां रोजा रखकर दिया त्याग और धैर्य का संदेश

दैनिक बुद्ध का संदेश
इटवा/सिद्धार्थनगर। स्थानीय तहसील क्षेत्र के ग्राम बढ़या निवासी नौ वर्षीय अल्तमश हुसैन और ग्राम बिशुनपुर मंेहदानी निवासी दस वर्षीय निकहत परवीन ने 27वां रोजा रख कर परिवार और गांव का नाम रोशन किया है।कम उम्र में उनके इस अनुशासन और समर्पण की हर ओर सराहना हो रही है। बच्चों का कहना है कि हम लोग थोड़े-थोड़े रोजा रखकर अभ्यास करते आ रहे हैं। उम्र बढ़ने के साथ हम लोगों का संकल्प भी मजबूत होता गया।अल्तमश के दादा परवेज अहमद का कहना है कि उसके छोटी उम्र को देखते हुए उसे रोजा रखने के लिए कोई बाध्य नहीं करता है। लेकिन अल्तमश का कहना है कि ईश्वर के प्रति सच्ची निष्ठा से मैं शौक से रोजा रखता हूं। इसी तरह ग्राम बिशुनपुर मेहदानी निवासी जमील अहमद की 10 वर्षीय पुत्री निकहत परवीन का कहना हम शौक से रोजा रखते हैं। रोजा रखने से ईश्वर में अटूट श्रद्धा और अनुशासन का बोध होता है।अल्तमश ने बताया कि दिन में कमजोरी महसूस होती है, लेकिन दृढ़ निश्चय और धैर्य से सब सहज हो जाता है। वहीं निकहत ने कहा कि रोजा सिर्फ शरीर को भूख, प्यासा रखने का मतलब नहीं है। यह इन्द्रियों को वश में करने, बुराईयों से दूर रहने और नेक काम करने का संदेश देता है।इन दोनों बच्चों के प्रयास ने समाज को यह संदेश दिया है कि यदि मन में दृढ़ इच्छा और आत्मविश्वास हो, तो कोई भी कार्य कठिन नहीं होता। यह इस्लाम धर्म में आस्था रखने वाले उन लोगों के लिए संदेश है जो पवित्र रमजान माह में खुले आम खाते पीते हैं। दूसरों की बुराई करते हुए नेक कार्यों से दूर हैं।




