युवा सप्ताह के समापन पर हुई संगोष्ठी, विवेकानन्द जी के विचारों की डिजिटल युग में प्रासंगिकता पर विमर्श

दैनिक बुद्ध का संदेश
शोहरतगढ़़/सिद्धार्थनगर। स्थानीय शिवपति स्नातकोत्तर महाविद्यालय में युवा सप्ताह के अन्तिम दिन रविवार को एक प्रेरणादायक संगोष्ठी का आयोजन महाविद्यालय के लोअर हाल में प्रातः 11रू00 बजे से किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती की पूजा एवं अर्चना से हुई, जिसके पश्चात संगोष्ठी का विधिवत शुभारम्भ हुआ। संगोष्ठी का विषय था ष्स्वामी विवेकानन्द जी के युवाओं के प्रति मूल्य और विचार रू वर्तमान डिजिटल युग के परिप्रेक्ष्य मेंष्, जिसमें महाविद्यालय के यशस्वी प्राचार्य प्रो0 अरविन्द कुमार सिंह मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। प्राचार्य प्रो0 सिंह ने अपने सारगर्भित उद्बोधन में स्वामी विवेकानन्द जी के जीवन, उनके नैतिक मूल्यों, विचारों और युवाओं के प्रति उनके दृष्टिकोण पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विवेकानन्द जी का जीवन आत्मबल, सेवा और राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा देता है। डिजिटल युग में युवाओं को तकनीक का उपयोग आत्मविकास, सामाजिक सुधार और राष्ट्रहित में करना चाहिए। उन्होंने विवेकानन्द जी के प्रसिद्ध मंत्र ष्उठो, जागो और तब तक रुको नहीं जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाएष् को आज के सन्दर्भ में भी अत्यन्त प्रासंगिक बताया। उन्होंने युवाओं को सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग आत्मप्रचार के बजाय आत्मविकास, संवाद और नवाचार के लिए करने का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में युवाओं की भूमिका निर्णायक है और विवेकानन्द जी के विचारों को डिजिटल माध्यमों से जन-जन तक पहुंचाया जा सकता है। नैतिकता, अनुशासन और सेवा की भावना को तकनीक से जोड़ना आज की आवश्यकता है। कार्यक्रम में मीडिया प्रभारी डॉ0 धर्मेन्द्र सिंह, स्वामी विवेकानन्द इकाई के कार्यक्रम अधिकारी डॉ0 रामकिशोर सिंह, राजीव मिश्रा, राजकुमार सोनकर तथा छात्र-छात्राएं समीक्षा, आर्यन, खुशी, दिनेश आदि ने सक्रिय सहभागिता की। कार्यक्रम का संचालन रानी लक्ष्मीबाई इकाई के कार्यक्रम अधिकारी डॉ0 ए0के0 सिंह ने कुशलतापूर्वक किया। संगोष्ठी ने युवाओं को स्वामी विवेकानन्द जी के विचारों से जोड़ते हुए उन्हें डिजिटल युग में सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।




