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उत्तर प्रदेशश्रावस्ती

श्रावस्ती के सीता द्वार घाट पर आस्था और श्रद्धा के साथ मनाया गया छठ महापर्व

श्रावस्ती। आस्था, श्रद्धा और सादगी का प्रतीक छठ महापर्व जनपद के विभिन्न घाटों पर हर्षाेल्लास और भक्ति भाव के साथ मनाया गया। श्रावस्ती के प्रसिद्ध सीता द्वार घाट पर सोमवार की शाम सैकड़ों श्रद्धालुओं ने अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि और आरोग्यता की कामना की। इस दौरान घाट पर पारंपरिक गीतों और पूजा के स्वर गूंजते रहे। सुबह से ही श्रद्धालु व्रती महिलाएं सिर पर डाला लिए हुए नदी तट की ओर रवाना हुईं। टोकरी में फल, ठेकुआ, नारियल, गन्ना और दीपक सजाकर महिलाएं पूरे विधि-विधान से सूर्य देव की उपासना के लिए पहुंचीं। घाटों पर भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिलीं, जहां हर वर्ग और समुदाय के लोग एक साथ खड़े होकर पूजा में शामिल हुए। सीता द्वार घाट पर प्रशासन और नगर पंचायत की ओर से साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए थे। पुलिस बल और स्वयंसेवक लगातार निगरानी करते रहे ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की असुविधा न हो। छठ पूजा चार दिवसीय आस्था का पर्व है, जिसमें नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और प्रातःकालीन अर्घ्य के माध्यम से व्रती महिलाएं सूर्य देव और छठी मैया की आराधना करती हैं। यह पर्व बिना किसी भेदभाव के समाज को एक सूत्र में पिरोता है। श्रावस्ती के सीता द्वार घाट पर जब डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया गया, तो पूरा माहौल भक्ति और उत्साह से सराबोर हो गया। दीपों की रोशनी और “छठ मइया” के गीतों से गूंजता वातावरण श्रद्धा और समर्पण की भावना को जीवंत कर रहा था। मंगलवार की सुबह व्रती महिलाएं उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर व्रत का समापन करेंगी। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे घाटों पर स्वच्छता और अनुशासन बनाए रखें। छठ महापर्व ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि सादगी, आस्था और एकता के माध्यम से समाज में शांति और सौहार्द कायम किया जा सकता है।

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