घुट-घुट के मरने और कौवों के नोच- नोच कर मांस निकाल कर खाने का दर्द क्या होता है जरा एक बार महसूस करें – देवेश मणि त्रिपाठी

सिद्धार्थनगर। उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार भले ही गौवंशों के संरक्षण को लेकर लाख जतन कर लें, उसके भूसा, चारा-पानी व गौवंश के रख-रखाव लिए लाखों-करोड़ों रुपया खर्च कर दें, लेकिन दिन-दिन प्रतिदिन गौशालाओं की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। ताजा मामला जनपद के बढ़नी विकास खण्ड के ग्राम पंचायत परसोहिया का है जिसका वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो को आरटीआई एक्टिविस्ट व अधिवक्ता देवेश मणि त्रिपाठी ने अपने फेसबुक वॉल पर शेयर करते हुए लिखा कि ष्क्या अब हिन्दुत्व खतरे में नहीं है? क्या यह पाप नहीं? उन्होंने जिलाधिकारी सिद्धार्थनगर को एफ़बी पर टैग करते हुए यह भी लिखा कि साहब इससे अच्छा तो इन्हें मुक्त ही कर देते। घुट-घुट के मरने और कौवों के नोच- नोच कर मांस निकाल कर खाने का दर्द क्या होता है जरा एक बार महसूस करें। दुर्भाग्य है जिस प्रयोजन से गौशाला का नींव रखा गया होगा, उसके विपरीत आज गौशालाएं गौवध केन्द्र बनती जा रही है। बड़ी हृदय विदारक घटनाएं है। एक तरफ जिन्दा गये जमीन पर पड़ी है, तो दूसरी तरफ उन्हें पक्षी नोच रहे है, वह चिल्ला रही है, किन्तु कोई सुनने वाला नहीं। यह है विकास खण्ड बढ़नी के ग्राम पंचायत परसोहिया के टोला लंगड़ी में बने गौशाला का दृश्य। यह केवल एक दिन का नहीं बल्कि आये दिन की कहानी है। आज गो रक्षकों और हिन्दू धर्म के पुरोधाओं से भी प्रश्न, आप कहां है? क्या आपका हृदय इन गौशालाओं में वीभत्स रूप से तड़पती और घुट-घुट कर मरती। गायों की स्थिति देखकर भी नहीं तड़पता। क्या धर्म अब मात्र राजनीतिक हथियार बनकर रह गया है? क्या गौ माताओं की रक्षा सड़को मात्र पर लोगो को दिखाने के लिए मात्र रह गई है? या वास्तव में इनकी जो दुर्दशा है उनपर भी आपकी आत्मा जागेगी? जिलाधिकारी महोदय आपसे यही अपेक्षा है, अब की सड़कों आप लोगो को और सरकार को दिखाने के लिए लाव लश्कर के साथ घूमते रहे किन्तु हकीकत यही है कि यशस्वी मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट गौशालाओं में गायें तड़पती रहे। भ्रष्टाचार जनपद को खोखला करती रहे। अगर जनपद की समस्याएं आपसे नहीं हल होती तो महोदय विनम्र अनुरोध है कि सरकारी डीजल फूंकना तो बन्द ही कर दीजिए, कम से कम टैक्स पेयरों का पैसा तो बचेगा। आज मेरा प्रश्न राघवेन्द्र प्रताप सिंह से भी है क्या यही हिन्दुत्व खतरे में नहीं है? क्या इन गौ माताओं की निर्मम पर आपकी आंखें नम नहीं होती? और जनपद के आन्दोलनजीवियो तथा हिन्दू धर्म के ठीकेदारों से भी मेरा प्रश्न है क्या आप सभी को यहां पाप नहीं दिखाता। कम से कम इन गायों पर तो दया करें।




