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उत्तर प्रदेशसिद्धार्थनगर

शिवपति स्नातकोत्तर महाविद्यालय में गांधी जयन्ती पर स्वच्छता, विचार और प्रेरणा का संगम

शोहरतगढ़़/सिद्धार्थनगर। स्थानीय शिवपति स्नातकोत्तर महाविद्यालय में गुरुवार को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं पूर्व प्रधानमंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री की जयन्ती के अवसर पर एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन राष्ट्रीय सेवा योजना की स्वामी विवेकानन्द एवं रानी लक्ष्मीबाई इकाई के संयुक्त तत्वावधान में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत महाविद्यालय परिसर में स्वयंसेवकों द्वारा स्वच्छता अभियान से हुई, जिसमें छात्रों ने परिसर की सफाई कर गांधी जी के स्वच्छ भारत के स्वप्न को साकार करने का सन्देश दिया। प्रातः 10 बजे महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो0 अरविन्द कुमार सिंह द्वारा ध्वजारोहण किया गया। अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि गांधी जी का जीवन सत्य, अहिंसा और आत्मबलिदान की मिसाल है। आज जब हम उनके विचारों को याद करते हैं, तो यह आवश्यक है कि हम उन्हें केवल स्मरण न करें, बल्कि अपने जीवन में आत्मसात करें। स्वच्छता, सादगी और सेवा की भावना को अपने आचरण में लाना ही सच्ची श्रद्धांजलि है। युवा पीढ़ी को चाहिए कि वे गांधी जी के विचारों को आधुनिक सन्दर्भों में समझें और समाज में सकारात्मक परिवर्तन के वाहक बनें। ध्वजारोहण के पश्चात महाविद्यालय के लोअर हॉल में संगोष्ठी का आयोजन हुआ, जिसकी शुरुआत मां सरस्वती, महात्मा गांधी एवं लाल बहादुर शास्त्री के चित्रों पर पुष्प अर्पण से हुई। मुख्य वक्ता प्रो0 अरविन्द कुमार सिंह ने गांधी जी के विचारों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि गांधी जी का दर्शन केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि नैतिक और आध्यात्मिक पुनर्जागरण का मार्ग है। हमें उनके सिद्धान्तों को केवल पढ़ना नहीं, जीना चाहिए। कार्यक्रम में महाविद्यालय के शिक्षकगण, एनएसएस स्वयंसेवक एवं एनसीसी कैडेट्स ने भी गांधी जी एवं शास्त्री जी के विचारों पर चर्चा की। वक्ताओं ने उनके जीवन से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने की आवश्यकता पर बल दिया। इस अवसर पर कार्यक्रम अधिकारी डॉ0 ए0के0 सिंह, डॉ0 राम किशोर सिंह, मीडिया प्रभारी डॉ0 धर्मेन्द्र सिंह, मेजर मुकेश कुमार, प्रो0 सुशील कुमार, डॉ0 अखिलेश कुमार, डॉ0 प्रवीण कुमार, डॉ0 अजय सिंह, राजू प्रजापति, इन्द्रदेव वर्मा, जयराम, पंकज सिंह, अश्वनी सिंह तथा छात्र-छात्राएं समीक्षा सिंह, खुशी, नीलू आदि की सक्रिय सहभागिता रही। कार्यक्रम ने न केवल गांधी जी के विचारों को पुनः जीवन्त किया, बल्कि छात्रों में सामाजिक उत्तरदायित्व, स्वच्छता और सेवा भावना को भी प्रबल किया।

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